
सावित्रीबाई एवं फातिमा शेख ने मिलकर नारी शिक्षा के लिए काफी संघर्ष किया
एकल नारी सशक्ति संगठन की ओर से 17 मार्च को गोड्डा जिले के बोआरीजोर स्थित सिदो- कान्हू आदर्श विद्यालय प्रांगण में अंतर्राष्ट्रीय महिला माह के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें संजलि के स्वागत गीत के बाद राधा देवी ने अपने जीवन वृतांत को विस्तार से व्यक्त किया। क्षेत्र संगठिका सुहागिन टूटू ने एकल नारी सशक्ति संगठन के परिचय विस्तार से दिया। बताया कि कैसे सिंगनी दई और कैली दई ने अपने भेष बदलकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। रोहतासगढ़ से आए अंग्रेजों को अपने गांव में ही काटना शुरू किया। तब बाकी अंग्रेज भाग गए। उन्होंने सावित्रीबाई फुले एवं फातिमा शेख की जीवनी पर विस्तार से बताया। सावित्रीबाई एवं फातिमा शेख ने मिलकर नारी शिक्षा के लिए काफी संघर्ष किया, जिससे आज महिलाएं शिक्षा ग्रहण कर पा रही हैं।
एकल नारी सशक्ति संगठन बहुत अच्छा काम कर रहा है- हीरामन पंडित
सिदो-कान्हू आदर्श विद्यालय के प्रधान शिक्षक हीरामन पंडित ने कहा कि एकल नारी सशक्ति संगठन बहुत अच्छा काम कर रहा है। संगठन शोषित, वंचित महिलाओं के हक अधिकार के लिए लड़ाई लड़ रहा है। सभी महिलाओं को अपने हक अधिकार के लिए जागरूक होना होगा। जागरूक होने के लिए शिक्षित होना बहुत जरूरी है। उन्होंने अपने घर, परिवार के बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा एक ऐसा माध्यम है, जिससे सभी ज्ञान प्राप्त कर कलम की ताकत से अपने अधिकार के लिए लड़ सकते हैं।
जब फूलो मुर्मू और झानो मुर्मू ने 21 अंग्रेजों को कुल्हाड़ी से काट डाला-गुलाबफूल
स्कूल की शिक्षिका गुलाबफूल ने कहा, “झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने देश की आजादी के लिए काफी लड़ाई लड़ी। ठीक उसी तरह हमारे भोगनाडीह के सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने भी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। जब अंग्रेजों ने रूगनी और डुगनी को अगवा कर लिया, तब फूलो मुर्मू और झानो मुर्मू ने 21 अंग्रेजों को कुल्हाड़ी से काट डाला। गांव के एक बुजुर्ग व्यक्ति ने इन दोनों के कारनामें को देख लिया और उन्होंने इन दिनों को संथाली में “बाह कुड़ी” से संबोधित करते हुए धन्यवाद दिया। आज बाकुड़ी नाम का रेलवे स्टेशन बन गया। आज हम चैन की सांस ले पा रहे हैं। हमें भी अपने हक अधिकार के लिए जागरूक होकर लड़ाई लड़ने की जरूरत है। उन वीरांगनाओं को हमें याद करने की जरूरत है। जिन्होंने हमारे लिए अपने प्राण को त्याग दिया।”
आज हमें स्वतंत्र भारत में मतदान करने का अधिकार प्राप्त है-कुमार दिलीप
कुमार दिलीप ने कहा, “जिस तरह से अंग्रेजों के खिलाफ बाबा तिलका मांझी, फूलो-झानो, चांद-भैरव, सिदो-कान्हू और बिरसा मुंडा ने लड़ाइयां लड़ी। ठीक उसी तरह पूरे देश के अलग-अलग राज्यों में भी अंग्रेजों के खिलाफ कई महिलाएं लड़ाई लड़ी, जिनमे सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख, झांसी की रानी, कस्तूरबा गांधी, सिंगनी दई, कैली दई, रूणिया, झुनिया, सरोजिनी नायडू जैसे कई उदाहरण हैं, जिन्होंने अलग-अलग भूमिका अदा की। आज हमें स्वतंत्र भारत में मतदान करने का अधिकार प्राप्त है। हमें उन महिलाओं को याद करने की जरूरत है। उनके इतिहासों को कलमबद्ध करना है, ताकि हमारी भविष्य की युवा पीढ़ी उनको जाने-पहचाने और याद करे।”
इससे पूर्व संगोष्ठी के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया गया। इसके बाद देश की वीरांगनाओं की तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया। संगोष्ठी में राजाभीटा, लीलातारी, कुसबिल्ला, डकैता, बाबूपुर, मेंघी और दलदली पंचायत से आई सभी साथियों ने पुष्प अर्पण किया।
प्रभाती टुडू ने संगोष्ठी का संचालन किया और अंत में सभी महिलाओं को धन्यवाद देकर संगोष्ठी को समाप्त किया।

शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
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