
पिछले महीने 23 अगस्त की शाम को भारत के चंद्रयान-3 का नाम पूरी दुनिया की जुबां पर छा गया, जब उसका लैंडर विक्रम चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड कर गया. ISRO के चंद्रयान-3 मिशन ने देश का नाम हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर दुनिया के कोने-कोने से इस मिशन को सफल बनाने वाले लोगों के लिए बधाई आ रही हैं. ऐसे में यदि आपसे कहा जाए कि इस अभियान के लिए सबसे अहम हिस्सा यानी लॉन्चपैड बनाने वाली टीम का एक टेक्नीशियन रोजी-रोटी के लिए सड़क किनारे इडली बेच रहा है तो आपको कैसा लगेगा? जी हां,
यही सच है. झारखंड की राजधानी रांची के ध्रुवा एरिया में पुराने विधानसभा भवन के सामने दीपक कुमार उपरारिया का इडली स्टॉल है. दीपक सरकारी कंपनी हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड में टेक्नीशियन के पद पर तैनात हैं, लेकिन उन्होंने अपनी नौकरी में पिछले 18 महीने से वेतन नहीं मिलने के बाद घर चलाने के लिए यह इडली स्टॉल खोल लिया है. HEC ने ही चंद्रयान-3 का स्लाइडिंग डोर और इसके लॉन्चपैड का फोल्डिंग प्लेटफॉर्म बनाया था, जिसकी टीम में दीपक भी शामिल थे.
2,800 कर्मचारियों को नहीं मिला है वेतन
BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, दीपक उपरारिया समेत HEC के 2,800 कर्मचारियों को पिछले 18 महीने से वेतन नहीं मिला है. उपरारिया अपने घर का खर्च चलाने के लिए पिछले कुछ दिन से इडली का स्टॉल लगा रहे हैं. हालांकि इसके साथ ही वह कंपनी जाकर अपना काम भी करते हैं. सुबह वे इडली बेचते हैं. इसके बाद ऑफिस जाते हैं और शाम को भी इडली बेचने के बाद घर लौटते हैं.
Meet Deepak Kumar Uprariya who sells Tea & Idli in Ranchi. He is a Technician, who worked for building ISRO's Chandrayaan-3 launchpad. For the last 18 months, he has not received any salary.
"When I thought I would die of hunger, I opened an Idli shop" (BBC Reports) pic.twitter.com/cHqytJvtfj
— Cow Momma (@Cow__Momma) September 17, 2023
क्रेडिट कार्ड से चला रहे थे घर, अब 2 लाख रुपये का कर्ज
दीपक के मुताबिक, शुरुआत में उन्होंने वेतन नहीं मिलने पर क्रेडिट कार्ड के जरिये घर का खर्च चलाने की कोशिश की. इस कोशिश में क्रेडिट कार्ड बिल में उनके ऊपर 2 लाख रुपये का कर्ज हो चुका है, जिसकी किश्त नहीं भरने पर बैंक ने उन्हें डिफॉल्टर घोषित कर दिया है. इसके बाद ही उन्होंने अपने रिश्तेदारों से चार लाख रुपये उधार लेकर इडली स्टॉल शुरू किया है. उन्होंने कहा, अब तक मैं किसी का एक भी रुपया वापस नहीं कर पाया हूं. इस कारण लोगों ने उधार भी देना बंद कर दिया है. मैंने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर मिले पैसों से भी कुछ दिन तक घर का खर्च चलाया है.
भूखे मरने की नौबत आई तो इडली बेचनी शुरू की
दीपक का कहना है कि जब उधार भी मिलना बंद हो गया और घर में भूखे मरने की नौबत आ गई तो मैंने इडली स्टॉल खोलने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा, मेरी पत्नी बहुत अच्छी इडली बनाती है. मैं रोजाना इडली बेचकर 300 से 400 रुपये तक कमा लेता हूं, जिसमें 50 से 100 रुपये मेरा प्रॉफिट होता है. इससे ह मेरा घर चल रहा है.
मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं दीपक, 2012 में आए थे रांची
BBC के मुताबिक, दीपक मूल रूप से मध्य प्रदेश के हरदा जिले के रहने वाले हैं. वह साल 2012 में एक निजी कंपनी की नौकरी छोड़कर HEC में नौकरी करने आए थे.
उन्होंने 8,000 रुपये के वेतन पर HEC में यह सोचकर जॉइन किया था कि सरकारी कंपनी होने के कारण उनका भविष्य संवर जाएगा. हालांकि अब यह सपना टूट चुका है.
फीस नहीं भर पाए, स्कूल रोजाना देता है बेटियों को निकालने की धमकी
दीपक के मुताबिक, मेरी दो बेटियां हैं, दोनों स्कूल जाती हैं. इस साल उनकी स्कूल फीस नहीं जमा हो पाई है. स्कूल से रोजाना नोटिस भेजा जाता है. क्लासरूम में टीचर सबके सामने उन बच्चों को खड़ा होने के लिए कहते हैं, जिनके माता-पिता HEC में काम कर रहे हैं. इसके बाद उन बच्चों को सभी बच्चों के सामने प्रताड़ित किया जाता है. दीपक के मुताबिक, मेरी बेटियां स्कूल से घर लौटकर रोती हैं. उन्हें रोते देखकर मेरा दिल टूट जाता है, लेकिन मैं उनके सामने रो भी नहीं पाता हूं.
Source – DNA

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