
साकची की पहचान आमबगान मैदान अपना होने का दावा करने वाली आमबगान मस्जिद कमेटी इसे पाने के लिए हाईकोर्ट पहुंच गई है। एक बार सफलता नहीं मिली तो दूसरी बार गई है। हालांकि इसके खिलाफ जिला प्रशासन ने भी प्रति शपथ पत्र दायर किया है। 20 साल पहले इस विवाद की शुरुआत हुई थी। 2002 में तत्कालीन सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी (एएसओ) नरेन्द्र कुमार शर्मा ने मस्जिद कमेटी के पक्ष में फैसला दे दिया था।
आमबगान मैदान की जमीन की प्रकृति बिहार सरकार की
दरअसल, उस समय तक आमबगान मैदान की जमीन की प्रकृति बिहार सरकार की थी। परंतु उन्होंने सेक्शन-90 में आदेश पारित कर इसे गैरमजरुआ सर्वसाधारण कर दिया। इस प्रकार जमीन की प्रकृति बदल दी, जिससे इस पर खास समुदाय का स्वामित्व तय हो गया। परंतु शर्मा ने यह काम अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर किया था। उन्हें सेक्शन-87 में सर्वे के एक साल के भीतर हुई अपील पर कागजी त्रुटि सुधारने का अधिकार था, न कि जमीन की प्रकृति बदलने का। जबकि मस्जिद कमेटी सर्वे के अंतिम प्रकाशन के लगभग पांच साल बाद अपील में गई थी।
टाटा स्टील ने इस आदेश के खिलाफ डीसी कोर्ट में अपील की
इस आदेश की जानकारी मिलने पर शहर की लीजधारक कंपनी टाटा स्टील ने इस आदेश के खिलाफ डीसी कोर्ट में अपील की। डीसी कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद शर्मा के आदेश को 2016 में खारिज कर दिया। मस्जिद कमेटी ने बाद में इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, परंतु अदालत ने डीसी के आदेश को सही माना। अब फिर से मस्जिद कमेटी ने दोबारा अपील की है। इस मामले में मस्जिद कमेटी के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पिछली बार कोरोना काल में एटेंडेंस नहीं होने के कारण हाईकोर्ट ने केस को होल्ड कर दिया था। इसलिए हमने दोबारा अपील की है। उनका यह भी कहना है कि अदालत डीसी से पूछने वाला है कि 12 साल बाद किसी मामले में उन्हें इस प्रकार का आदेश देने की क्या जरूरत पड़ गई।

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