
शहर की 10 सैरात बाजार की 7718 दुकानों के बढ़े किराये के पुनर्निधारण का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। दिसंबर 2022 के आरंभ में डीसी कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लिए धालभूम के अनुमंडल पदाधिकारी के पास भेज दिया था। परंतु तब से इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है। डीसी विजया जाधव की कोर्ट ने 15 दुकानदारों की ओर से दायर किराया निर्धारण वाद का निष्पादन करते हुए इस मामले को एसडीएम कोर्ट में भेज दिया था। साथ ही आदेश दिया था कि एसडीएम फिर से इस मामले की सुनवाई कर उचित किराया निर्धारण करते हुए स्वच्छ आदेश पारित करें।
चूंकि एसडीएम किराया निर्धारण अधिकारी भी हैं, इसलिए उन्हें फिर से इसके लिए कवायद शुरू करनी होगी। परंतु अबतक कुछ नहीं होने से दुकानदार निश्चिंत हैं कि उन्हें पुरानी दर से मामूली किराया देना पड़ रहा है। इस विषय पर आंदोलन करने वाला सिंहभूम चैम्बर भी शांत है कि दुकानदार कोई शिकायत नहीं कर रहे हैं। परंतु सरकार को हर माह लाखों का नुकसान हो रहा है। वर्तमान में जो किराया लिया जा रहा, वह दशकों पुरानी दर के अनुसार है।
सरकार और टाटा स्टील में कंपनी बिल्ट दुकानों के किराये का विवाद
जमशेदपुर में 52.73 एकड़ सरकारी जमीन पर सैरात बाजार की ये दुकानें बनी हुईं हैं। लंबे समय से इनका संचालन टाटा स्टील कर रही थी। सरकार और टाटा स्टील में कंपनी बिल्ट दुकानों के किराये का विवाद था। हालांकि बाद में समझौता हो गया और उसने पिछले महीने बकाया 17 करोड़ 66 लाख रुपये जमा कर दिए। समझौते के अनुसार, उसने दुकानों को जिला प्रशासन के माध्यम से जमशेदपुर अक्षेस को हस्तांतरित कर दिया। चूंकि इन दुकानों का किराया निर्धारण कई दशक पूर्व हुआ था, इसलिए उन्हें सौंपने से पहले टाटा स्टील ने किराया पुनर्निधारण का केस एसडीएम कोर्ट में दायर किया।
तत्कालीन एसडीएम संदीप कुमार मीणा ने इसकी सुनवाई की। फिर कार्यपालक दंडाधिकारियों की मदद से बाजार का सर्वे कराया। तत्पश्चात वर्तमान मार्केट दर से किराया निर्धारित किया। परंतु किराये को लेकर विवाद हो गया, क्योंकि अधिकांश दुकानदार सौ, सवा सौ रुपये मासिक किराया देते थे। जबकि किराये का निर्धारण वर्गफुट पर किया गया जो अतिकतम 80 रुपये तक पहुंच गया। इसी बात पर दुकानदार आंदोलन हो उठे। चैम्बर ने उनका साथ दिया।

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