
एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में रोज क्षमता से अधिक मरीज भर्ती हो रहे हैं। 50 बेड की इमरजेंसी में हर दिन ज्यादा मरीज के भर्ती होने से इलाज की गुणवत्ता और व्यवस्था दोनों प्रभावित हो रही है। बेड फुल होने से स्ट्रेचर पर मरीजों का इलाज होता है। हालांकि अब जमीन पर इलाज की नौबत नहीं आ रही है, लेकिन बेड की कमी बरकरार है।
इमरजेंसी वार्ड का विस्तार होने से यह संभावना जताई जा रही थी कि बेड की समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन 13 बेड बढ़ने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। इमरजेंसी में मरीजों को बेड उपलब्ध कराने के लिए बेड मैनेजमेंट सिस्टम लागू है, जिसकी मॉनिटरिंग खुद डीसी विजया जाधव करती हैं। इसके तहत एमजीएम अस्पताल के किस वार्ड में कितने मरीज भर्ती हुए और कितने डिस्चार्ज हुए, इसकी रोज रिपोर्ट ली जाती है।
वार्ड में मरीजों को शिफ्ट करने का है निर्देश
डीसी ने एमजीएम अधीक्षक को निर्देश दिया कि इमरजेंसी में इलाज के बाद मरीजों को संबंधित वार्ड में शिफ्ट किया जाए। क्योंकि जितने मरीज इमरजेंसी से वार्ड में शिफ्ट होंगे, उतना ही जगह वहां बनेगा और नए आने वाले मरीजों को बेड भी मिल सकेगा।
नए अस्पताल में बेड की नहीं होगी कमी
अधिकारियों का कहना है कि एमजीएम अस्पताल जल्द ही मेडिकल कॉलेज में बन रहे नए अस्पताल में शिफ्ट होने वाला है। नए अस्पताल में 100 बेड की इमरजेंसी होगी। इस कारण वहां मरीजों को इलाज कराने में परेशानी नहीं होगी।

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