
टाटा स्टील के द्वारा जमशेदपुर एवं कलिंगानगर (ओडिशा) को विकास गलियारा के रूप में विकसित किए जाने के खिलाफ झारखंड पुनरूत्थान समिति की पदयात्रा मंगलवार को ओडिशा पहुंची। स्थानीय लोगों ने सभी का स्वागत किया। अभियान के मुख्य संयोजक सन्नी सिंकु, पूर्व राज्यसभा सांसद दुर्गाप्रसद जामुदा एवं पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू की अगुवाई में पदयात्रा की शुरूआत 9 जून को भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस के दिन शुरू हुई थी।
सन्नी सिंकू ने कहा कि 2006 में ओडिशा सरकार और टाटा कंपनी ने आदिवासियों की जमीन पर जबरन कब्जा कर फैक्ट्री बनाई। इसका विरोध करने पर आदिवासियों पर गोली चलाई गई, जिसमें 13 आदिवासी मारे गए। आज तक इस घटना में शामिल नौकरशाहों पर कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही किसी जांच आयोग की रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई।
वीर भूमि में शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि
13 दिवसीय यात्रा के बाद कलिंगानगर पहुंचे समिति के सदस्यों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ शहीद आदिवासियों को वीर भूमि में पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को भी प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा रहा है। इसके पीछे एक ही कारण है आदिवासी मूलवासियों की जमीन को अधिग्रहण करने में सरकार और सरकरी तंत्र को मनमानी करने का अवसर मिल सके, ताकि फर्जी ग्रामसभा करके जमीन अधिग्रहण की असंवैधानिक प्रक्रिया को पूरी की जा सके।

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