
नेशनल डेस्क: मंगलवार केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) के मामले में शहर के एक होटल 18 मालिक और उसके दो साथी के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दिये गये पीड़िता के बयान पर अदालत गौर करेगी और यदि यह विश्वसनीय पाया गया तो आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो मामले में अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी जाएगी।
न्यायमूर्ति गोपीनाथ पी. ने होटल 18 के मालिक रॉय जे वयालत और उनकी मित्र अंजलि वदाक्केपुरक्कल तथा सायजु एम थैंकचन– की पहली जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ऐसा कहा। आरेापियों ने का कहना है कि पीड़िता की मां ने उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न का आरोप उन पर लगाया है। उनका यह भी कहना है कि शिकायत कथित घटना के तीन महीने बाद इस साल जनवरी में दर्ज कराई गई।
पीड़िता की मां ने शिकायत में बताया कि आरोपियों ने उसे और उसकी बेटी को एक बैठक के बहाने होटल 18 में बुलाया था। वहां वयालत ने उसकी बेटी का यौन उत्पीड़न कर उसका वीडियो बनाया। पीड़िता की मां इसी होटल में काम करती थी। घटना के बाद वह दोनों होटल से चली गईं और अंजलि ने तब वीडियो तथा पीड़िता की अन्य तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाल दीं।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, नाबालिग पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिये गए अपने बयान में तीनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाये हैं।

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