
बिहार-झारखंड के सभी विश्वविद्यालय के शिक्षक व कर्मचारियों का भविष्य निधि कार्यालय का पीएफ अकाउंट ही नहीं है। यह मामला हाल ही में कोल्हान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सीनेट की बैठक में उठा है। विश्वविद्यालयों में लागू स्टेच्यूटरि पीएफ के नाम पर कर्मचारियों एवं शिक्षकों से सरकारी नियमानुसार मूल वेतन से दस प्रतिशत की राशि की कटौती की जाती है। इस राशि को कालेज द्वारा संयुक्त बैंक खाता में जमा किया जाता है। बैंक राष्ट्रीयकृत बैंक होना चाहिए।
जमा राशि का नाम मात्र मिलता ब्याज
इस खाते से कालेज के प्रिंसिपल व संबंधित कर्मचारी एवं बर्सर के हस्ताक्षर से राशि की निकासी होती है। यह बचत खाता होता है। इसमें ब्याज भी बचत खाता के अनुसार दो-तीन प्रतिशत के बीच ही मिलता है। इसमें भी इनकम टैक्स लगता है, जबकि भविष्य निधि के खाताधारकों को ब्याज भी आठ प्रतिशत से जयादा ब्याज मिलता है और इसमें कोई इनकम टैक्स की राशि में कटौती नहीं होती है।
सरकार कालेज के कर्मचारियों व शिक्षकों को सरकारी कर्मचारी होने का दर्जा तो देती है, लेकिन उनका पीएफ अकाउंट अन्य सरकारी सेवकों की तरह नहीं है। इस कारण शिक्षक व कर्मचारी परेशान हो उठे हैं। इन्हें अलग से कोई पीएफ नंबर भी नहीं मिलता, बल्कि बैंक का अकाउंट नंबर मिलता है। एक ही राज्य में पीएफ के लिए अलग-अलग नियम। मजेदार बात यह है कि पेंशन व ग्रेजुएटी सरकार के नियमानुसार ही मिलता है। इसके लिए सरकार राशि विश्वविद्यालय के खाते में भेज देती है।
पीएफ अकाउंट नहीं होने का ये हैं कारण
बिहार सरकार के अधिनियम के अनुसार विश्वविद्यालयों को विशुद्ध सरकारी नहीं माना जाता है। इन्हें आटोनोमस या अंगीभूत माना जाता है। इस कारण उस दौरान शिक्षकों के चुनाव लड़ने पर भी कोई रोक नहीं था। डा. जगन्नाथ मिश्र समेत ऐसे कई उदाहरण जिन्होंने चुनाव लड़ा। वर्ष 1976 में बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट एंड स्टेच्यूट बना। इसी आधार पर कालेज और कर्मचारी के संयुक्त बैंक खाते में पीएफ की राशि को जमा किया जाता है। बिहार के नियमों को ही झारखंड में अंगीकृत किया गया।
तीन तरह का होता है पीएफ
पीएफ तीन तरह का होता है। एक स्टेच्यूरी पीएफ यानि पूरी तरह सरकारी सेवकों के लिए। दूसरा रिकोगनाइज पीएफ। इस श्रेणी वैसे संस्थान आते हैं जिसे सरकार ने 1925 एक्ट के तहत मान्यता दी है। इनकी राशि भी भविष्य निधि के पीएफ अकाउंट में जमा होती है। तीसरा अन रिकागनाइज श्रेणी का पीएफ। इसी श्रेणी में बिहार-झारखंड के विश्वविद्यालय व कालेज के शिक्षक व कर्मचारी है। इस श्रेणी के कर्मचारी व सेवकों को पीएफ के नाम पर राशि कटौती तो होती है, लेकिन उसकी राशि को बैंक में रखा जाता है।
कोल्हान विश्वविद्यालय के अधिकारी का क्या है कहना..
कोल्हान विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी सह प्रवक्ता डा. पीके पाणि का कहना है कि सीनेट में विश्वविद्यालय और कालेज के शिक्षकों एवं कर्मचारियों के अन्य सरकारी सेवकों के अनुसार पीएफ अकाउंट नंबर व पीएफ की राशि नहीं मिलने का मामला उठा था। यह अविभाजित बिहार के समय से ही है। बिहार विश्वविद्यालय नियम को ही झारखंड में अंगीकृत किया गया है। विश्वविद्यालय व कालेज के शिक्षकों एवं कर्मियों की राशि बैंक के बचत खाता में जमा होती है। अन्य सरकारी सेवकों की तरह कालेज के शिक्षकों एवं कर्मियों का पीएफ नंबर नहीं है। उन्हें भविष्य निधि कार्यालय के पीएफ मे जमा राशि का ब्याज भी नहीं मिलता है, उल्टा उन्हें बैंक में जमा राशि का टैक्स देना पड़ता है। –डा. पीके पाणि, वित्त पदाधिकारी सह प्रवक्ता, कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा।

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