
अवैध तरीके से मोबाइल कनेक्शन लेने वालों के खिलाफ अब दूरसंचार विभाग कार्रवाई कर रहा है। पिछले छह माह में दूरसंचार विभाग ने झारखंड-बिहार के डेढ़ लाख से अधिक मोबाइल कनेक्शन बंद किए हैं। विभाग के सूत्रों के मुताबिक कनेक्शन लेते समय कई तरह की गड़बड़ियां की गयी थीं। जिसकी आईडी दी गयी थी उसकी तस्वीर नहीं थी। ऐसा ऑनलाइन फ्रॉड के लिए किया जाता है। इस तरह के फ्रॉड में लिप्त अपराधी कार्रवाई से बचने के लिए कई हथकंडे अपनाते हैं। लेकिन अब विभाग डाटाबेस साफ करने में जुट गया है। इसका नजीता यह है कि छह माह में बड़ी संख्या में सिम बंद किए गए। वहीं, दूरसंचार अफसरों का कहना है कि यह सतत प्रक्रिया है, जो आगे भी जारी रहेगी।
अस्त्र नाम का सॉफ्टवेयर रोकेगा साइबर क्राइम
फ्रॉड दूरसंचार विभाग ने इस तरह के फ्रॉड को रोकने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया है। अस्त्र नामक इस सॉफ्टवेयर की खासियत यह है कि इसमें मोबाइल कंपनियों का डाटा डालते ही एक नाम पर जारी सिम में यदि अलग-अलग तस्वीर मिलती है तो उसे संदिग्ध की सूची में डाल दिया जाएगा।
संदिग्ध तरीके से संचालित फोन बंद होंगे
सूत्रों के मुताबिक फिलहाल डाटाबेस साफ किया जा रहा है। इसमें संदिग्ध तरीके से संचालित मोबाइल कनेक्शन बंद किए जा रहे हैं। इसके लिए आधुनिक और नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि जितने भी तरीके के फ्रॉड हो रहे हैं, वे इन्हीं नंबरों के जरिए हो रहे हैं।
झारखंड में 80 हजार फर्जी मोबाइल कनेक्शन
दूरसंचार विभाग के सूत्रों के मुताबिक बिहार सर्किल यानी झारखंड और बिहार में कुल डेढ़ लाख से अधिक मोबाइल कनेक्शन को डिस्कनेक्ट किया गया है। इसमें सिर्फ झारखंड के लगभग 80 हजार मोबाइल कनेक्शन शामिल हैं। ये कार्रवाई पिछले छह माह के भीतर की गई है।
साइबर फ्रॉड के लिए कुख्यात है जामताड़ा जिला
गौरतलब है कि झारखंड का जामताड़ा साइबर फ्रॉड के लिए देशभर में कुख्यात है। यहां साइबर क्राइम के लिए नए-नए हथकंडे अपनाए जाते हैं। मसलन, बैंक केवाईसी अपडेट करना, किसी क्वीज शो में विजेता बनने का लालच देना, बैंक लोन का ऑफर और सेक्सटॉर्शन। इसके लिए बड़ी संख्या में नकली आईडी से मोबाइल फोन, सिमकार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में दूरसंचार कंपनियों का ये प्रयास लोगों को साइबर फ्रॉड से बचाने की दिशा में काफी कारगर साबित होगा।

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