
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) इन दिनों सुर्खियों में है। कारण रविवार को आयोजित 67वीं पीटी की परीक्षा का पेपर आउट होना। इस मामले की जांच EOW की 12 सदस्यीय टीम कर रही है। पेपर लीक होने के पीछे आयोग की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। आठ मई को भोजपुर (Bhojpur) के जिस कुंवर सिंह कॉलेज में धांधली की खबरें आईं। जहां पर्चा आउट होने का आरोप लगा परीक्षार्थियों ने जमकर बवाल काटा, वो कॉलेज कभी नकल कराने को लेकर ब्लैकलिस्ट में था। पांच साल पहले एक परीक्षा को लेकर ही इस कॉलेज को बैन कर दिया गया था। ऐसे में इस कॉलेज को परीक्षा का केंद्र बनाने से आयोग के अफसर सवालों के घेरे में हैं।
5 साल पहले बैन, मान्यता रद्द
साल 2017 कुंवर सिंह कॉलेज में ग्रेजुएशन की परीक्षा चल रही थी। परीक्षार्थियों को एक बरामदे में बैठाकर एग्जाम दिलाए जा रहे थे। इसका एक वीडियो सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। तब इस कॉलेज में सेंटर देना बैन कर दिया गया। कई छात्र इस कॉलेज में एडमिशन के नाम पर धांधली की शिकायत भी कर चुके हैं। यही कारण है कि दो साल बाद ही 2019 में कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी ने इसकी मान्यता भी रद्द कर दी थी।
आखिर BPSC क्यों बनाया सेंटर
कॉलेज दागी है, बावजूद इसके आयोग ने रविवार को आयोजित 67वीं पीटी परीक्षा का सेंटर यहां बना दिया। यहां 900 परीक्षार्थियों को पेपर देना था। जब परीक्षा शुरू हुई तो इसी कॉलेज में बवाल हुआ। सोशल मीडिया पर पेपर का स्क्रीनशॉट वायरल हो गया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी कॉलेज पहुंचे और पेपर सील करवाया। अब मामले की जांच की जा रही है। यहां के प्रिंसिपल और स्टॉफ से भी पूछताछ चल रही है। लेकिन आयोग के अफसर सवालों के घेरे में हैं कि आखिर एक दागी कॉलेज को BPSC की परीक्षा का सेंटर क्यों बनाया गया?

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