
यहां बच्चों-युवाओं को हॉकी के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा
झारखंड के पिछड़े जिले सिमडेगा के जिन गांवों में आज तक सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुबिधायें नहीं पहुंची है, वहां लोगों में हॉकी का जुनून है. इसकी एक जिंदा मिसाल है जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर जंगलों-पहाड़ों से घिरे केरसई ब्लॉक के रुंघुडेरा गांव, जहां कुछ समय पहले तक बंदूकें गरजती थीं, लेकिन नए साल के पहले दिन यहां हॉकी के जरिए बदलाव की एक नई शुरूआत हुई है.
गांव के ही आकाश मांझी ने हॉकी के लिए दी जमीन
हॉकी ग्राउंड के लिए गांव के ही आकाश मांझी ने अपनी जमीन दी है. हॉकी सिमडेगा के प्रमुख मनोज कोनबेगी और आकाश मांझी ने गांव के लोगों के साथ बैठक की, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि गांव और आसपास के बच्चों-युवाओं को हॉकी के लिए प्रशिक्षित किया जाए. निर्णय को अमल में लाते हुए तुरंत ग्रामीणों ने जंगल-झाड़ को साफ कर मैदान बना डाला.
दिया जाएगा प्रशिक्षण
हॉकी का मैदान बनकर तैयार होते ही गांव के बच्चों और युवाओं में एक नए उत्साह का संचार हो गया. हॉकी सिमडेगा के प्रमुख मनोज कोनबेगी ने बताया कि इस गांव के बच्चों और युवाओं को हॉकी के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा और लगभग डेढ़ महीने के अंदर आस-पास के गांवों के बच्चों के बीच हॉकी टूर्नामेंट का आयोजन कराया जाएगा. इसमें जो बेहतर खिलाड़ी निकलेंगे, उन्हें आगे जिला स्तर पर खेलने का मौका दिलाने का प्रयास होगा. सिमडेगा जिले के लिए गौरव की बात है कि इसने देश को अब तक देश को 50 से भी ज्यादा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी दिए हैं.
गांव की मौजूदा हालत
आज़ादी के 75 वर्षों के बाद भी रुंघुडेरा गांव में आज तक न तो बिजली पहुंची है और न ही बनी है सड़क, मोबाइल का नेटवर्क तो दूर की बात. पक्की सड़क से उतरने के बाद लगभग 6-7 किलीमीटर पथरीली पगडंडियों पर चलने के बाद लोग इस गांव में पहुंच सकते हैं. 50 आदिवासी परिवारों वाले इस गांव की जनसंख्या लगभग 250 है. पेयजल के लिए गांव के लोग कच्चे कुओं और तालाबों पर निर्भर हैं. जंगलों से घिरे इस गांव में हाथियों का भी आतंक है. सिमडेगा गांव-गांव में कुछ साल पहले तक जब उग्रवादी संगठनों का आतंक व्याप्त था, यहां उग्रवादियों के हथियारबंद दस्ते पनाह लेते थे. गांव में एक पाठशाला है, लेकिन वहां पहुंचने के लिए भी बच्चों को जोखिम उठाना पड़ता है.
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सेवईं खूंटीटोली निवासी नॉवेल टोप्पो भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे
गांव में खेलकर देश-विदेश में सैकड़ों टूर्नामेंट्स में जौहर दिखाने वाले खिलाड़ियों की एक बड़ी फेहरिस्त है. सिमडेगा के जिस हॉकी खिलाड़ी को इंडियन नेशनल टीम में सबसे पहले जगह मिली थी, वो थे सेवईं खूंटीटोली निवासी नॉवेल टोप्पो. वो 1966-67 में देश के लिए खेले. इसके बाद 1972 में ओलंपिक खेलने वाली भारतीय पुरुष टीम में यहां के माइकल किंडो शामिल रहे.

शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
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