
विवाद की शुरुआत तब शुरू हुई, जब गवर्नमेंट पीयू कॉलेज फॉर विमेन में छह छात्राओं को हिजाब पहन कर आने से रोक दिया गया. छात्राओं ने कॉलेज के फैसले को मानने से इनकार कर दिया था और हाईकोर्ट में इसके खिलाफ दायर कर दी. छात्राओं ने इस फैसले के विरोध में कक्षाओं का बहिष्कार कर रखा था और छह छात्राओं ने याचिका दायर कर कहा था कि हिजाब पहनना उनका संवैधानिक अधिकार है. छात्राओं ने कहा कि उन्हें इससे रोका नहीं जा सकता.
मंगलवार सुबह ही दावणगेरे, हरिहर और शिवमोगा जिले में छात्रों और उपद्रवी तत्वों ने पुलिस पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए थे. टकराव तब शुरू हुआ, जब सुबह हिजाब पहन कर अपने-अपने कॉलेजों में जा रही लड़कियों को कुछ छात्र रोकने की कोशिश कर रहे थे. इससे छात्र-छात्राओं के दो गुटों के बीच झड़प शुरू हो गई थी. छात्राओं का एक गुट हिजाब पहने हुआ था, जबकि कुछ छात्र भगवा शॉल पहने पहुंच गए. दोनों गुटों के बीच नारेबाजी और तीखी बहस हुई. इस वजह से उडुपी में हिजाब मुद्दे पर कोर्ट का फैसला आने तक प्राइवेट कॉलेज बंद कर दिए गए.
कर्नाटक हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जज ने लोगों से अमन-चैन बनाए रखने की अपील की.
हाई कोर्ट में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई शुरू हुई . लेकिन सुनवाई से पहले सुबह से ही मामले ने हिंसक मोड़ ले लिया. हालांकि पथराव और नारेबाजी की कुछ घटनाओं के बाद पुलिस ने हालात काबू कर लिए. कर्नाटक हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जज ने लोगों से अमन-चैन बनाए रखने की अपील की. अब तक मामले की सुनवाई जज कृष्णा दीक्षित की सिंगल बेंच कर रही थी. अब यह मामला हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस को सौंप दिया गया है.
हम क्या पहनें इसका अधिकार हमें अनुच्छेद 19 (1) देता है.
अदालत ने कहा, ” सारी भावनाएं बाहर रखें. हम इस मामले में संविधान के आधार पर फैसला करेंगे. संविधान हमारे लिए भगवद् गीता है. हिजाब पर रोक को चुनौती देने वाली छात्राओं की ओर से दलील देते हुए उनके वकील देवदत्त कामथ ने कहा कि सरकार के आदेश में कुछ अदालती फैसलों को हवाला देकर छात्राओं को हिजाब पहनने से रोक दिया गया. लेकिन पवित्र कुरान में इसे ज़रूरी रवायत बताया गया है. हम क्या पहनें इसका अधिकार हमें अनुच्छेद 19 (1) देता है. लेकिन इस अधिकार पर सिर्फ अनुच्छेद ( 6) के जरिये ही रोक लग सकती है. सरकार ने जिन अदालती फैसलों का हवाला दिया है, वे इस मामले में लागू नहीं हो सकते.
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