
हंगामे की आड़ में प्रतिबंधित दवाइयां करवा दी भूमिगत
द प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला- खरसावां ने कंपनी की अधिकारी के खिलाफ कराई चांडिल थाने में शिकायत दर्ज
जिले के चांडिल थाना अंतर्गत भुइयांडीह स्थित रिनोविजन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड नामक हर्बल और होमियोपैथी दवा बनाने वाली कंपनी में बीती रात ड्रग कंट्रोलर विभाग के अधिकारी जांच के लिए पहुंचे, जहां से विभाग ने भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाइयों के सैंपल व दवाइयां जप्त की. हालांकि विभाग की कार्रवाई के बीच कंपनी की पदाधिकारी आशा सिंह उर्फ उषा कुमारी मीडिया कर्मियों से उलझ पड़ी, समाचार संकलन कर रहे मीडिया कर्मियों को खूब खरी-खोटी सुनाई और देख लेने तक की धमकी तक दे डाली. यहां तक कि महिला पदाधिकारी ने मीडिया कर्मियों के कैमरे से जबरन वीडियो क्लिप डिलीट करवाने का भी प्रयास किया और जांच टीम को बाधा पहुंचाने के उद्देश्य से मीडिया कर्मियों को निशाना बनाकर लाइट ऑफ करा दिया गया.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हंगामे की आड़ में कंपनी की अधिकारी ने प्रतिबंधित दवाइयों को भूमिगत करवा दिया.
भारत सरकार की लेबोरेटरी जांच में पाए गए एलोपैथिक केमिकल सैंपल
दरअसल रिनोविजन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड मूल रूप से होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक दवाइयां बनाती है. इसके पास होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने का लाइसेंस है. कंपनी द्वारा दर्द निवारक दवा ऑर्थोवेट बनाई जाती है, जिसके खिलाफ विभाग को शिकायत मिलने के बाद पिछले साल दिसंबर महीने में विभाग ने कंपनी में दबिश देते हुए दवाइयों के सैंपल लेकर भारत सरकार के लेबोरेटरी में जांच के लिए भेजा था. साथ ही जांच रिपोर्ट आने तक कंपनी का लाइसेंस रद्द करते हुए दवाइयां बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. भारत सरकार के लेबोरेटरी में जांच कराने पर उसमें से एलोपैथिक केमिकल के सैंपल पाए गए.
जांच टीम को गुमराह करने के उद्देश्य से मीडिया कर्मियों के साथ की बदसलूकी
फरवरी महीने में रिपोर्ट आने के बाद ड्रग कंट्रोल विभाग ने शुक्रवार को कंपनी में दबिश दी और दवाइयों के नमूने जप्त किए. इसके अलावा और भी सैंपल कलेक्ट किए. विभाग की दबिश और मीडिया कर्मियों की मौजूदगी कंपनी की अधिकारी हजम नहीं कर सकी और जांच टीम को गुमराह करने के उद्देश्य से मीडिया कर्मियों के साथ बदसलूकी शुरू कर दी और कवरेज कर रहे मीडिया कर्मियों को खूब खरी-खोटी सुना डाली. यहां तक कि दवाइयों के नमूने और दवाइयां ठिकाने लगाने के उद्देश्य से अधिकारी ने लाइट ऑफ करवा दिया.
मीडिया कर्मियों व जांच अधिकारियों से बदसलूकी निंदनीय- ड्रग इंस्पेक्टर
इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर जया कुमारी ने बताया कि पिछले साल दिसंबर महीने में उक्त कंपनी द्वारा निर्मित ओर्थोवेट दवाइयों को जप्त करते हुए तत्काल लाइसेंस रद्द कर दिया गया था. रिपोर्ट में दवाइयों में एलोपैथिक मिश्रण की पुष्टि हुई है. जिसके बाद विभाग के वरीय पदाधिकारियों के निर्देश पर पुनः कंपनी में जांच की गई. इस क्रम में प्रतिबंधित दवाइयों के सैंपल और नमूने कलेक्ट किए गए हैं, जिसकी जानकारी विभाग के डायरेक्टर को दे दी गई है. उनसे निर्देश प्राप्त होने के बाद सीजेएम कोर्ट में पेश किया जाएगा. उन्होंने भी कंपनी के अधिकारी द्वारा मीडिया कर्मियों एवं जांच अधिकारियों के साथ किए गए बदसलूकी पर नाराजगी जताई और कहा अधिकारी ने जांच में सही तरीके से सहयोग नहीं किया है. इसकी शिकायत भी की जाएगी.
जिले के पत्रकारों में भारी आक्रोश
उधर पत्रकारों पर हुए बदसलूकी मामले को लेकर जिले के पत्रकारों में रोष है. इस घटना के बाद पत्रकार संगठन द प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला- खरसावां ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कंपनी की अधिकारी के खिलाफ चांडिल थाने में शिकायत दर्ज कराई है. चांडिल थाना प्रभारी शंभू शरण दास ने भी इस घटना पर जांच कर दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया है. वहीं द प्रेस क्लब और सरायकेला- खरसावां के अध्यक्ष मनमोहन सिंह ने इसे मीडिया की आजादी पर हमला बताते हुए राज्य सरकार से राज्य के पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर अविलंब पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किए जाने की मांग की है.
उन्होंने बताया कि ऐसे कृत्यों से समाज में गलत असर पड़ता है और मीडिया के अधिकारों का हनन होता है. पत्रकारों के लिए कोई ठोस कानून नहीं होने के कारण ऐसे लोग मीडिया कर्मियों को आसानी से जलील कर निकल जाते हैं. उन्होंने इस घटना की तीखी भर्त्सना की है. साथ ही ड्रग कंट्रोल विभाग से पूरे मामले की जांच कर दोषी कंपनी एवं कंपनी पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.
पत्रकारिता पर हमले के खिलाफ कब बनेगा सख्त कानून ?
लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ का दर्जा प्राप्त है. सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया कर्मियों को भीड़ का हिस्सा नहीं मानते हुए उन्हें सुरक्षा देने की बात करती है, मगर इसके लिए कोई ठोस कानून बनाने पर बाकी तीनों स्तंभ चुप हैं. यही कारण है कि देश में पत्रकारों पर आए दिन हमले हो रहे हैं और उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाया जा रहा है. किसी सरकारी अधिकारी की शान में गुस्ताखी हो तो सरकारी काम में बाधा की धाराएं लगाकर केस दर्ज कर दिया जाता है, एक महिला केवल आरोप लगा दे, तो प्राथमिकता के आधार पर गैर जमानती धाराओं के तहत किसी पर भी मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है. मगर पत्रकारिता पर अगर हमला हो तो उसके लिए क्या कानून है ?
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शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
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