
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में पीपीपी मोड पर संचालित पैथोलॉजी लैब मेडॉल पर फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। एमजीएम अस्पताल की जांच रिपोर्ट में मेडॉल की ओर से कई फर्जीवाड़े का उल्लेख किया गया है। फर्जीवाड़ा के चलते मेडॉल का लगभग 14 करोड़ रुपए का भुगतान रुक गया है।
जांच रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
एमजीएम अस्पताल की जांच रिपोर्ट में मेडॉल की ओर से किए गए कई फर्जीवाड़े का उल्लेख किया गया है। इनमें शामिल हैं:
- छुट्टी के दिनों में अधिक बिल: मेडॉल की ओर से छुट्टी के दिनों में अधिक बिल किए गए हैं। जांच में पाया गया कि शनिवार और रविवार को मेडॉल की ओर से किए गए बिलों की संख्या अन्य दिनों की तुलना में अधिक थी।
- एक डॉक्टर के हस्ताक्षर सबसे ज्यादा: जांच में पाया गया कि मेडॉल की ओर से किए गए बिलों पर एक डॉक्टर के हस्ताक्षर सबसे ज्यादा हैं। यह भी पाया गया कि इस डॉक्टर के हस्ताक्षर कई बार एक ही दिन में कई बार किए गए हैं।
- पूरे परिवार की जांच एकसाथ: जांच में पाया गया कि मेडॉल की ओर से कई बार एक ही परिवार के सदस्यों की जांच एक साथ की गई है। यह भी पाया गया कि इन जांचों के लिए अलग-अलग बिल दिए गए हैं।
क्या कहना है एमजीएम अस्पताल प्रबंधन का ?
एमजीएम अस्पताल प्रबंधन ने मेडॉल की ओर से किए गए फर्जीवाड़े की पुष्टि की है। प्रबंधन ने कहा कि फर्जीवाड़े के चलते मेडॉल का लगभग 14 करोड़ रुपए का भुगतान रुक गया है। प्रबंधन ने कहा कि मेडॉल को फर्जीवाड़े के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मेडॉल प्रबंधन का क्या कहना है?
मेडॉल प्रबंधन ने फर्जीवाड़े के आरोपों को खारिज किया है। प्रबंधन ने कहा कि जांच रिपोर्ट में जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह से गलत हैं। प्रबंधन ने कहा कि वह जल्द ही जांच रिपोर्ट का जवाब देगा।
फर्जीवाड़े की जांच की जाएगी
एमजीएम अस्पताल प्रबंधन ने फर्जीवाड़े की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी जल्द ही मामले की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

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