
दुर्गा पूजा को वास्तव रुप में शक्ति पाने की इच्छा से मनाया जाता है जिससे की बुराईयों का अंत किया जा सके। लोगों का विश्वास होता है कि देवी दुर्गा का आशीर्वाद पराप्त होगा और दुर्गा माता उन्हें सभी समस्याओं और नकारात्मक ऊर्जा से दूर रखेंगी। हिन्दू धर्म के हर त्यौहार के पीछे सामाजिक कारण होता है। दुर्गा पूजा एक ऐसा त्योहार है जो हमारे जीवन में उत्साह एवं ऊर्जा का संचार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दुर्गा पूजा को दुर्गा का उत्सव या नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है।
दुर्गा पूजा का उत्सव भारत के असम, उड़ीसा, बंगाल, झारखंड, मणिपुर और त्रिपुरा में व्यापक रूप से मनाया जाता है। बंगाल के अलावा दुर्गा पूजा भारत के दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र आदि राज्यों में नवरात्रि पूजा के नाम से मनाया जाता है। दुर्गा पूजा या नवरात्रि पूजा साल में दो बार चैत्र और आश्विन माह में मनाया जाता है। आज दुर्गा पूजा के छठे दिन के रूप में मनाया जा रहा है।
प्रतिमा दुर्गा पूजा आने के ठीक 2 महीने पहले से बननी शुरू हो जाती है
पूजा बंगालियों का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार होता है। कोलकाता में इससे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। बांकुड़ा में स्थित चाचौड़ नामोंपाड़ा में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा ने सबका मन मोह लिया है। यहां की प्रतिमा दुर्गा पूजा आने के ठीक 2 महीने पहले से बननी शुरू हो जाती है। से ज्यादा खास बात यह है कि यह वही मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा बनाई जाती है। यहां के कारीगरों की कारीगरी को देख सब उत्साह से परिपूर्ण हो जाते हैं। यहां हर तरह की रीति रिवाज के साथ और बहुत आराधना के साथ दुर्गा मां की पूजा की जाती है।

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