
मजदूरों की हड़ताल व किसान संघर्ष की पहली वर्षगांठ पर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन
कोविड अवधि में मजदूरों की आम हड़ताल और ऐतिहासिक किसान संघर्ष की पहली वर्षगांठ के अवसर पर अखिल भारतीय स्तर के कार्यक्रमों के तहत आज 26 नवम्बर को पूरे कोल्हान क्षेत्र में कई स्थानों में किसान और मजदूर संगठनों द्वारा स्वतंत्र और संयुक्त प्रदर्शन किया गया। ब्लॉक और ग्राम स्तर के कार्यक्रमों के अलावा केंद्रीय कार्यक्रम के तहत विभिन्न ट्रेड यूनियनों के सैकड़ों सदस्यों और किसान संगठनों द्वारा आमबागान (नेताजी सुभाष मैदान) से पदयात्रा तथा बिरसा चौक साकची में एक नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम के तहत किसान संघर्ष के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के अलावा कोविड अवधि में किसानों और मजदूरों के ऐतिहासिक संघर्ष और उपलब्धियों को भी याद किया गया। इसके अलावे राष्ट्रीय संपत्ति बेचने पर रोक, लेबर कोड की वापसी, एमएसपी की घोषणा, विद्युत संशोधन विधेयक को निरस्त करने जैसी लंबित मांगों को पूरा करने के लिए संघर्ष को तेज करने का संकल्प लिया गया।
नुक्कड़ सभा में वक्ताओं ने मजदूर वर्ग के सक्रिय और जनता के नैतिक समर्थन के साथ संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसानों द्वारा निरंतर संघर्ष की शुरुआती जीत यानी तीन काले कृषि कानून को निरस्त होने के लिए उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह सरकार के लिए स्पष्ट संदेश है कि भविष्य में भी धन-उत्पादक वर्ग यानी मजदूर और किसान सत्ताधारी सरकार की जनविरोधी नीतियों को कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे।
‘ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच’ द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा, मूल्य वृद्धि और अप्रत्यक्ष कर एवं शुल्कों में कटौती, प्रवासी श्रमिक, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, न्यूनतम मजदूरी, नौकरी की सुरक्षा, जैसे ज्वलंत मुद्दों भविष्य के संघर्षों के केंद्र बिंदु होंगे। इन सभी ज्वलंत और लंबित मुद्दों पर देश की पीड़ित जनता के बीच गहन प्रचार अभियान चलाया जाएगा। यदि सरकार इन ज्वलंत मुद्दों का समाधान करने में विफल रहती है तो बजट सत्र के दौरान देश के पूरे मजदूर वर्ग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। भविष्य के इस कार्यक्रम के लिए प्रचार अभियान आज 26 नवंबर यानि संविधान दिवस से शुरू किया गया।
आज के कार्यक्रम में केके त्रिपाठी, जेपी सिंह, विश्वजीत देब, गुप्तेश्वर सिंह, नागराजू, एस.बिस्वास, केडी प्रताप, पीआर गुप्ता, जफर खान, जयशंकर प्रसाद, रुनु यादव, सरोज यादव ,अरविंद कुमार , ओमप्रकाश सिंह और अन्य ट्रेड यूनियन और किसान संगठन के नेता उपस्थित थे ।

शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
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