
गोपाल मैदान बिष्टुपुर में चल रहे टाटा स्टील के संवाद में जनजातीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति आकर्षण का केन्द्र रही. लाइफ स्टाइल से संबंधित डायबिटीज बीमारी के इलाज की बात हो या किसी तरह के दर्द के निवारण की. हर मर्ज का इलाज यहां पर है. असम के सुकोमल देवड़ी नल ट्रीटमेंट यानी कील ठोक कर दर्द का इलाज करते हैं. वे पैरों पर छेनी और हथौड़ी इस तरह चलाते हैं, जैसे लोहे पर चला रहे हों. लेकिन कमाल की बात है कि इस मार से मरीज को कोई दर्द नहीं होता. सुकोमल बताते हैं-आजकल गठिया की आम समस्या है. एक उम्र के बाद यह समस्या होती है और चलना मुश्किल हो जाता है.
हम कील पद्धति से इलाज करते हैं और शरीर की धमनियों से अशुद्ध रक्त को बाहर निकाल देते हैं. इससे दर्द से तुरंत राहत मिलती है. इस तकनीक से इलाज करा रहे शुभेन्दू मजूमदार ने कहा कि काफी राहत मिली है. चलना मुश्किल हो गया था. मेले में जब देखा तो इनसे इलाज कराया.
गढ़चरौली के वैद्यों ने बनाया डायबिटीज का पाउडर
महाराष्ट्र के ग़ड़चिरौली से आए वैद्यों ने डायबिटीज की बीमारी का पाउडर बना रखा है. बताया-सुबह और शाम इसके सेवन से डायबिटीज कन्ट्रोल रहता है. मधुमेह नाशक इस चूर्ण के वैद्य हनुमंत विठ्ठल नरोटे हैं. इसी तरह से राजस्थान से आए सुंदर लाल और अमृत लाल ने बताया कि वे शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने वाली दवाएं लाए हैं. गिलोय की बनी दवाईयां कई बीमारियों के निवारण में काम आती है. राजस्थान के प्रतापगढ़ से आए इन हीलरों ने कहा कि कोरोना के दौरान इन दवाईयों की काफी मांग रही और लोगों ने इससे लाभ उठाया.

Join Mashal News – JSR WhatsApp
Group.
Join Mashal News – SRK WhatsApp
Group.
सच्चाई और जवाबदेही की लड़ाई में हमारा साथ दें। आज ही स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें! PhonePe नंबर: 8969671997 या आप हमारे A/C No. : 201011457454, IFSC: INDB0001424 और बैंक का नाम Indusind Bank को डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर कर सकते हैं।
धन्यवाद!