
सात सूत्री मांगों को लेकर करीब 900 सरकारी और निजी डॉक्टर बुधवार को 24 घंटे तक कार्य बहिष्कार किया। बुधवार सुबह 6 बजे से कार्य बहिष्कार शुरू हो गया है, जो गुरुवार सुबह 6 बजे तक चलेगा। इस दौरान मरीजों का इलाज नहीं करेंगे। इमरजेंसी सेवाओं को आंदोलन से मुक्त रखा गया है। लेकिन सरकारी और निजी अस्पतालों में ओपीडी में डॉक्टरों ने मरीज का इलाज नहीं किया, जिससे काफी परेशानी हुई। सारे चिकित्सकगण एमजीएम में जमा हुए और वहां से पैदल मार्च निकालकर डीसी ऑफिस पहुंचे, जहां डीसी को आईएमए की ओर से ज्ञापन सौंपा गया। आईएमए अध्यक्ष डॉ. जीसी माझी और सचिव डॉ. सौरभ चौधरी ने बताया कि इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर जिले में सारे डॉक्टर काम का बहिष्कार किया है।
इससे लोगों को परेशानी जरूर हो रही है। लेकिन जिस तरह राज्य में डॉक्टरों को निशाना बनाया जा रहा है, वैसी स्थिति में सरकार को सख्त कदम उठाना चाहिए। 15 दिनों में रांची, गढ़वा, हजारीबाग, जामताड़ा, पेटरवार, लोहरदगा में डॉक्टर के साथ अधिकारी और नेताओं ने बदसलूकी की और उनपर हमले हुए। रिम्स के चिकित्सक डॉ. सौरभ की मौत के बाद भी सरकार की ओर से आश्रित परिवार के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। इसके अलावा मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को झारखंड में लागू नहीं किया जा रहा है। झारखंड में 50 बेड के अस्पताल एव एकल क्लीनिक को क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट से मुक्त रखने की मांग है।

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