
देश में निजीकरण का जैसे एक दौर चल पड़ा है. आने वाले तीन सालों में 25 हवाई अड्डों का मौद्रिकरण होगा. क्यों ? आइये जानें. हवाई यात्रियों की संख्या बढ़ रही है. यह नागरिक उड्डयन विभाग के लिए उत्साहित करने वाली खबर है. हालाँकि देश के 136 हवाई अड्डों में से 133 को 2020-21 में कोरोना वायरस महामारी के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा है. आगे भी ऐसे हालात रहें, तो विमानन क्षेत्र को घाटा सहने के लिए तैयार रहना पड़ेगा. अब सरकार ने विमानन क्षेत्र को फायदे का सौदा बनाने के लिए नया मोनेटाइजेशन प्लान बनाया है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके तहत आने वाले तीन सालों में 25 हवाई अड्डों का मौद्रिकरण होगा.
केंद्र सरकार की इस योजना की जानकारी देते हुए नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री वीके सिंह ने बताया कि इनकी सूची तैयार करने के लिए देश के हवाई अड्डों का चयन उनके वार्षिक यातायात के रुझान को देखते हुए किया गया है. उन्होंने कहा कि 0.4 मिलियन (चार लाख) से अधिक यात्रियों के वार्षिक यातायात वाले सभी हवाई अड्डों को निजीकरण के लिए चुना गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में कालीकट, कोयंबटूर, नागपुर, पटना, मदुरई, सूरत, रांची और जोधपुर हवाई अड्डों का निजीकरण किया जाएगा. इसके बाद वित्त वर्ष 2023-24 में चेन्नई, विजयवाड़ा, तिरुपति, वड़ोदरा, भोपाल और हुबली हवाई अड्डों की बारी आयेगी. फिर साल 2025 तक इंफाल, अगरतला, उदयपुर, देहरादून और राजामुंद्री एयरपोर्ट को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है.
तो क्या जो भी संस्थान घाटे में चलेंगे, उनका निजीकरण कर दिया जाएगा ? यह किस प्रकार का समाधान है ? उनकी खामियों को दूर कर भी तो उन्हें सही ट्रैक पर लाया जा सकता है.

शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
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