
विश्व विधवा दिवस के उपलक्ष्य में नामकुम के बगाईचा में दो दिनी संकल्प सभा संपन्न
विश्व विधवा दिवस के मौके पर 24 जून को एकल नारी सशक्ति संगठन एवं ‘स्वर’ की ओर से आयोजित एकल महिलाओं की संकल्प सभा के दूसरे दिन खासकर विधवा महिलाओं ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सिफारिश के मुताबिक झारखंड सहित देश के सभी जिले में विधवा प्रकोष्ठ स्थापित करने की मांग की, ताकि विधवा महिलाओं को प्रशासन से सबल होने में सहायता मिलने के साथ एकल खिड़की से सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिल सके।
आज भी विधवाओं के साथ भेदभाव जारी है
संकल्प सभा के दूसरे दिन झारखंड के विभिन्न जिलों से आई विधवा महिलाओं ने बारी बारी से अपनी आपबीती सुनाई। आपबीती के मुताबिक आज भी उनके साथ भेदभाव जारी है। उन्हें अपशगुन बताकर सामाजिक और पारिवारिक समारोहों में और दैनिक जीवन में उनका बहिष्कार जारी है। विधवा महिलाओं ने सामूहिक रूप से यह संकल्प किया कि वे अब रूढ़िवादी और अंधविश्वासी समाज की निराधार और अमानवीय हिदायतों का पालन नहीं करेंगी। वे भविष्य में होने वाली विधवा महिलाओं पर जबरन विधवा प्रथा को थोपने वाली कार्रवाई का डट कर विरोध करेगी। साथ ही पुनर्विवाह में आने वाली सभी तरह की बाधाओं को दूर करेंगी।
विवाह की इच्छुक विधवाओं को दोबारा शादी करने से डरने की जरूरत नहीं
इसके पहले महाराष्ट्र में विधवा पुनर्विवाह आंदोलन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए विख्यात डी एस लहाने ने विधवा महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि विवाह की इच्छुक विधवाओं को दोबारा शादी करने से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह उनका मौलिक अधिकार है जिसे मानवाधिकार आयोग सहित देश की सभी सरकारें प्रोत्साहित कर रही हैं। लहाने महाराष्ट्र में सैकड़ों विधवा महिलाओं का सामूहिक विवाह का आयोजन कराने के अनुभवों को साझा करते हुए लहाने ने कहा कि आमतौर पर विधवा महिलाएं अक्सर अपने बच्चों के हित को देखते हुए दोबारा विवाह करने से कतराती हैं, जो सही नहीं हैं क्योंकि उनके दोबारा विवाह करने से उनके पहले पति से हुए बच्चों के हितों पर कोई आंच नहीं पड़ता। उन्हें उत्तराधिकार कानून के अनुसार पिता की संपत्ति से कोई भी बेदखल नहीं कर सकता।
महिलाओं के हित में पुरुषों द्वारा भी संकल्प करने की जरूरत -प्रमोद झिंजाड़े
संकल्प सभा में विधवा प्रथा विरोधी आंदोलन के प्रमोद झिंजाड़े ने विधवा प्रथा को खत्म करने के लिए महिलाओं के हित में पुरुषों द्वारा भी संकल्प करने की जरूरत बताई। प्रमोद जी की अपील के मद्देनजर मौके पर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता विश्वनाथ आजाद, वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत एवं कुमार दिलीप ने एलान किया कि वे भी वसीयत जाहिर करेंगें कि उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी पर विधवा प्रथा जबरन नहीं थोपा जाए। सामाजिक कार्यकर्ता बिन्नी ने एलान किया। वे भी वसीयत जाहिर करेंगीं कि उनके पति के मौत के मौत के बाद उनके ऊपर विधवा प्रथा जबरन नहीं थोपा जाए। क्योंकि यह संविधान और मानवाधिकार विरोधी कार्रवाई है।
आज के कार्यक्रम में मुख्य रूप से डी एस लगाने, प्रमोद झिंजाड़े, संदीप, कौशल्या देवी, लीलावती देवी, गुड़िया देवी, यास्मीन खातून, शांति देवी, प्रीति गुड़िया, डॉ विश्वनाथ आजाद, बिन्नी, कामेश्वर वर्मा, फा. टॉम, मेरी, सुहागिनी टुडू, सविता कौर, मनीषा, मोना हसन, परवाना खातून, समला बाला, सुबला देवी के अलावा सैकड़ों महिलाएं शामिल हुई।
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शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
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