
पुराना विधानसभा सभागार में आदिबासि कुड़मि समाज की एक विशेष बैठक संपन्न
पुराना विधानसभा सभागार में 13 जनवरी को आदिबासि कुड़मि समाज की एक विशेष बैठक केंद्रीय अध्यक्ष प्रसेनजीत महतो की अध्यक्षता में हुई. इस बैठक में विभिन्न स्थानों से उपस्थित समाज के सभी लोगों ने एक स्वर में कहा, “हम कुड़मि जनजाति हैं और हमारी जनजातीय मातृभाषा कुड़मालि है. हमारी लड़ाई हमारी मूल पहचान और अस्तित्व को लेकर है, सरकार जनभावनाओं की कद्र करते हुए उचित निर्णय लेकर न्यायोचित कदम उठाये.
झारखण्ड में हजारों वर्षों से निवास करने वाले सभी कुरमी या कुर्मी नहीं, बल्कि मूल रूप से कुड़मि हैं-प्रसेनजीत महतो
केंद्रीय अध्यक्ष प्रसेनजीत महतो ने जानकारी देते हुए बताया कि छोटानागपुर पठार अंतर्गत निवासित कुड़मि (KUDMI) समुदाय, जिन्हें कालांतर में भू-अभिलेखों में वर्तनी त्रुटि के तहत कई भिन्न नामों से अंकित किया गया है, वे सभी कुरमी या कुर्मी नहीं, बल्कि मूल रूप से कुड़मि हैं, सरकारी दस्तावेजों में इसकी पुष्टि 1903 में ही कर दी गई थी. साथ ही यह बिहार एवं अन्य संयुक्त प्रांतों के कुरमी समुदाय से भिन्न हैं, इसकी पुष्टि 1891 में ही कर दी गई थी. 1903 में ही इस बात की भी पुष्टि हो गई थी कि कुड़मि जनजाति की मातृभाषा का नाम कुड़मालि है (कुरमाली नहीं), जिसे बाद के अन्य विद्वानों ने भी स्वीकारोक्ति प्रदान किया. बावजूद इसके कुड़मालि भाषा के लिए शिक्षण संस्थानों में त्रुटिपूर्ण कुरमाली शब्द का ही प्रयोग किया जाता आ रहा है, जो न्याय संगत नहीं है.
शब्द संशोधित कर ‘कुड़मालि (KUDMALI)’ करने की मांग सरकार से की गई
उन्होंने आगे कहा, “इस संबंध में शब्द संशोधन को लेकर हमने विभिन्न विभागों, संस्थानों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा है. दिनांक 07.12.2023 को महामहिम राज्यपाल ने भी कुड़मालि भाषा से संबंधित हमारे पांच सूत्री मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है. विधानसभा के शीतकालीन सत्र 2023 के दौरान खरसवां के विधायक दशरथ गागराई ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तो जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने शून्यकाल में और गोमिया विधायक लम्बोदर महतो ने प्रश्नकाल में बेहतरीन ढंग से मामले को उठाते हुए विद्यालय से विश्वविद्यालय एवं यूजीसी तक प्रयुक्त त्रुटिपूर्ण कुरमाली (KURMALI) शब्द को पूर्णतः विलोपित कर कुड़मालि (KUDMALI) शब्द संशोधित करने की मांग सरकार से की”
मांगें नहीं माने जाने की स्थिति में होगा तेज आन्दोलन
लगभग 02 करोड़ से भी अधिक कुड़मि समाज की आवाज को सदन में मुखर होकर सटीक तरीके से रखने के लिए प्रसेनजीत महतो ने उनके प्रति आभार और धन्यवाद प्रकट करते हुए बाते, “माननीय झारखंड सरकार ने मामले को संज्ञान में लेते हुए संवैधानिक तौर पर गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से जल्द शब्द संशोधन का आश्वासन दिया है, जिस निर्णय का भी हम स्वागत करते हैं और अविलंब इसे अमल में लाने का निवेदन करते हैं. ऐसा नहीं होने पर समाज व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा.
धरना में झारखंड, बंगाल, ओड़िशा, असम एवं दिल्ली आदि से बड़ी संख्या में समाज के लोग होंगे शामिल
उन्होंने सूचना दी कि आगामी 21 फरवरी 2024 को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अपनी मातृभाषा कुड़मालि के मान-सम्मान में देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर विशाल धरना कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा और केंद्र सरकार को मांग-पत्र सौंपा जायेगा. इसमें झारखंड, बंगाल, ओड़िशा, असम एवं दिल्ली आदि से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल होंगे.
आज के इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से केंद्रीय सचिव बैजनाथ महतो, केंद्रीय संगठन सचिव चुरामन महतो, केंद्रीय संयुक्त सचिव रूपलाल महतो, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष पन्नालाल राम जुरुआर, प्रदेश सचिव निबारन महतो, दीपनारायण महतो, प्रकाश महतो, पंचानन महतो, भुवनेश्वर महतो, दिवाकर काछिमा, सत्यनारायण महतो आदि काफी संख्या में संगठन के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद थे.
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मुख्य मांगें
1) कुड़मालि भाषा के लिए त्रुटिपूर्ण कुरमाली (KURMALI) शब्द को संशोधित कर कुड़मालि (KUDMALI) करना, 2) कुड़मालि भाषा को जनजातीय भाषा की मान्यता देना, 3) भारत की जनगणना के भाषा सूची में कुड़मालि भाषा कोड लागू करना, 4) कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना और 5) कुड़मालि भाषा के पढ़ाई के लिए समुचित शिक्षकों, प्राध्यापकों और पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है।

शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
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