
संयुक्त ग्राम सभा मंच के तत्वावधान में आज 30 नवंबर को दलमा इको सेंसेटिव जोन के मुख्य द्वार पर चंपा व रजनी (हथनी) के भोजन, स्वास्थ्य व जंजीर से आजादी को लेकर गांव-गांव में जनसंपर्क अभियान चलाए जाने को लेकर पूरे इलाके में लोगों से संवाद स्थापित किया गया.। दलमा पहाड़ के तराई क्षेत्र शहर बेड़ा गांव के परम्परागत ग्राम प्रधान मान सिंह मार्डी के नेतृत्व में ग्रामीणों से चंपा व रजनी के सवालों को लेकर संवाद किया गया।
वन्य प्राणी आश्रयणी अभ्यारण्य के नाम पर मची है लूट-खसोट-ग्राम प्रधान मान सिंह मार्डी
परम्परागत ग्राम प्रधान मान सिंह मार्डी कहते हैं कि वन विभाग के डीएफओ व रेंजर के मिलिभगत से इको सेंसेटिव जोन के नाम पर वन्य प्राणी आश्रयणी अभ्यारण्य के नाम पर जो पैसा आ रहा है, उसमें लूट-खसोट मचा हुआ है। जिसका परिणाम है कि चंपा व रजनी का स्थिति दिनों -दिन खराब होती जा रही है। चंपा व रजनी को देखने से ये पता चलता है कि अब ये लोग तो इनके हिस्से का भोजन तक को भी खा रहा है।
इन हाथियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता कम लोगों को-विजय तंतुबाई
शहर बेड़ा का नौजवान विजय तंतुबाई कहते हैं कि संयुक्त ग्राम सभा के साथियों का जिस तरह वन प्राणी से प्रेम है। चंपा व रजनी के साथ सेल्फी लेने वाले लोग तो बहुत हैं, लेकिन शुकलाल पहाड़िया व अनूप महतो के तरह बहुत कम लोग देखने को मिलते हैं कि उनके स्वास्थ्य व भोजन के सवाल को लेकर चिंतित हैं। हम सब नौजवान इस मुहिम में आपके साथ हैं क्योंकि वन प्राणी का दर्द वही समझ सकता है जो इनके बीच पहला बढ़ा है।
RIP Senior Theater Artist of Jharkhand kuldev Mahto | Mashal News
चंपा व रजनी की इस हालत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर हो कठोर कार्रवाई-अनूप महतो
संयुक्त ग्राम सभा मंच के संयोजक अनूप महतो कहते हैं, “आदिवासी-मुलवासी कृषि व प्रकृति से अपना जीवन यापन करते हैं एवं कृषि से जो फसल उपजाते हैं, उसका पहला हिस्सा जीव-जंतुओं को देते हैं. उसके बाद जो उनसे बचता है उसे हम समेट कर घर लाते हैं। यह हक हमारे पूर्वजों से लेकर अब तक के पीढ़ी इन जीव जंतुओं को देते आया है। हम आदिवासी -मूलवासी इस देश का मालिक हैं, फिर हमारे जीव-जंतुओं के ऊपर अत्याचार करने का हक इस वन विभाग के पदाधिकारियों को कौन देता है? हम सरकार से मांग करते हैं कि चंपा व रजनी की इस हालात के लिए जो भी जिम्मेदार है। वक्त रहते हुए उस पर कठोर से कठोर कार्रवाई करें अन्यथा वृहद पैमाने पर आंदोलन चलाया जाएगा।”
इको सेंसेटिव जोन घोषित होने के बाद हमारे हक अधिकार व हमारी संस्कृतियों पर हमला-शुकलाल पहाड़िया
संयुक्त ग्राम सभा मंच के संयोजक सह पूर्व दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच के सचिव शुकलाल पहाड़िया कहते हैं, “किस तरह से दलमा पहाड़ में रहने वाले आदिवासी -मूलवासी के ऊपर इको सेंसेटिव जोन घोषित होने के बाद हमारे हक अधिकार व हमारी संस्कृतियों पर हमला किया गया। जिसका गवाही मैं हूं! यहां तक हम आदिवासी -मूलवासी जब उस समय अपने हक अधिकार को बचाने के लिए आवाज उठया तो हम आदिम जनजातियों को सलाखों के पीछे साजिश के तहत बंद कर दिया गया था।
फंड की बंदरबांट हो रही है !
उन्होंने कहा, “आज जब हम चंपा व रजनी को देखते हैं तो हमें लगता है कि ये सिर्फ हमारे आदिवासी -मूलवासियों पर ही हमला नहीं था, ये हमारे बीच रहने वाले वन्य प्राणियों पर भी हमला है। आज दलमा इको सेंसेटिव जोन के नाम पर जो फंड आता है, उसका कोई भी फायदा यहां रहने वाले आदिवासी -मूलवासियों को नहीं मिल पा रहा है, बल्कि उस फंड की बंदरबांट हो रही है। हम पूछना चाहते हैं यहां के वन विभाग के पदाधिकारियों से चंपा व रजनी के हिस्से का भोजन कौन खा रहा है? इनके स्वास्थ्य के लिए जिम्मेवार कौन है? डीएफओ जो एकअखबार में बयान जारी करते हैं कि चंपा 58 वर्ष की है और रजनी 13 वर्ष की है।
परम्परागत ग्राम सभा से कोई अनुमति क्यों नहीं ली ?
इन्हें जंजीरों में कैद करके रखने का अधिकार इसे कौन देता है? क्या वो चंपा व रजनी को जंजीर में कैद करके रखने से पहले दलमा पहाड़ में रहने वाले परम्परागत ग्राम सभा से कोई अनुमति ली है। अगर नहीं ली है तो ये भी एक तरह से ग्राम सभा का उल्लंघन ही है। क्या दलमा पहाड़ में वन प्राणियों को स्वतंत्र घुमने का अधिकार नहीं है आखिर ये कौन लोग होते हैं जो हमारे प्रकृति के साथ रहने वाले इंसानों से लेकर वन प्राणीयों के साथ खिलवाड़ करते हैं। आज हमारे देश में वन प्राणियों व पर्यावरण को लेकर बड़े-बड़े आयोजन तो होता है उस पर हमारे नेता व बुद्धिजीवी बड़ी बात तो करते हैं लेकिन चंपा व रजनी को जंजीरों में कैद करके रखा गया इस पर चुप्पी साधे हुए हैं, क्योंकि चंपा, रजनी एवं उनके वंशज उन्हें वोट नहीं करेंगे।
संयुक्त ग्राम सभा मंच ने चंपा व रजनी को जंजीरों से आजाद करने की मांग की है साथ ही चंपा व रजनी के हिस्से का भोजन खाने वाले विभागीय कर्मियों व अधिकारियों के खिलाफ जांच कर कठोर कार्रवाई की भी मांग की है। संवाद में शामिल थे – चंद्रभूषण सिंह, मास्को मुर्मू, पंकज हेम्ब्रम, विजय तंतुबाई, बिमल टुड्डू, सुनिल मार्डी, बुधूराम मुर्मू, रवि मुर्मू आदि।

शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
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