
देश को मानव तस्करी मुक्त बनाने के अभियान के तहत बच्चों की तस्करी रोकने के लिए रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) और बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) संस्था संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।
दोनों के बीच इस बाबत एक समझौता किया गया है। आरपीएफ ने मानव तस्करी रोकने के उद्देश्य से देश भर में कुल 740 स्थानों पर ऐसे केंद्र स्थापित किए हैं, जहां इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। इन केंद्रों पर इस दिशा में काम करने वाली अन्य संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।
रेलवे ने बच्चों की तस्करी रोकने लिए वर्ष 2018
‘आपरेशन नन्हे फरिश्ते’ चलाया था, जिसके तहत अब तक कुल 50 हजार से अधिक बच्चों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया जा चुका है। रेलवे ने हाल ही में एक और ‘आपरेशन आहट’ लांच किया है। इसमें मानव तस्करी रोकने के अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इसके तहत अब तक कुल 1400 से अधिक नाबालिगों को तस्करों के चंगुल से बचाया गया, जिसमें 298 नन्ही बच्चियां भी शामिल हैं।
आरपीएफ मानव तस्करी के विरुद्ध बचपन बचाओ आंदोलन के साथ मिलकर लोगों के बीच जागरूकता अभियान भी चलाएगा। इसके लिए संगठन की तरफ से आरपीएफ को संचार सामग्री, वायस मेसेज और वीडियो क्लिप आदि मुहैया कराई जाएगी, जिसे ट्रेनों और स्टेशनों पर नियमित तौर पर प्रसारित किया जाएगा। ताकि मानव तस्करी में शामिल लोगों में भय पैदा हो।
बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) की सीईओ रजनी सेखरी सिब्बल ने कहा कि देश में ‘चाइल्ड ट्रैफिकिंग’ रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल के साथ जुड़कर काम करने में हमें गर्व महसूस हो रहा है। कोरोना काल के दौरान बचपन बचाओ आंदोलन ने दस हजार से ज्यादा बच्चों को ट्रैफि¨कग से बचाया था। इनमें से ज्यादातर रेलवे स्टेशनों से बचाए गए थे। आरपीएफ के डायरेक्टर जनरल संजय चंदर ने चाइल्ड ट्रैफिकिंग के खिलाफ लड़ाई में बीबीए की भूमिका की सराहना कर कहा कि समझौते से इस लड़ाई को और मजबूती मिलेगी |

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