
टाटा स्टील फाउंडेशन के कर्मचारी ने कला और संस्कृति के महत्वपूर्ण पहलुओं के निरीक्षण का आयोजन किया है। चांडिल, टाटा स्टील फाउंडेशन के कर्मचारी रामचंद्र टुडु, नेपाल बेसरा, ने गांगुडीह पुर्नवास स्थल पर ओलचिकी भाषा, कला, और संस्कृति के महत्व को समझने का प्रयास किया है।
टाटा स्टील ग्रामीण कला और संस्कृति के महत्व को समझने का प्रयास कर रहा है, जो अब लुप्त हो रहे हैं। किसी भी समुदाय की भाषा, संस्कृति, और धर्म उसकी पहचान होती है, और इने नष्ट करने से समुदाय की अस्तित्व को खतरा होता है।
इस संदर्भ में, चांडिल में ओलचिकी भाषा और संस्कृति को बचाने के लिए आठ स्थानीय स्कूल चल रहे हैं। यह पहल के रूप में देखा जा सकता है, और इसका उद्देश्य टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से लुप्त हो रही भाषा, संस्कृति, और कला को बचाना है।
इस प्रयास के माध्यम से, गांगुडीह के माझी परगाना के लोग, जैसे कि लायक, श्यामल मार्डी, कैसे अपने समुदाय की धरोहर को सजीव रखने के लिए संकल्पित हैं।

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