
झारखंड एक लंबे समय से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के दंश से पीड़ित है। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन (केएससीएफ) ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान में जुटी स्वयंसेवी संस्थाओं ने झारखंड की इस स्थिति पर चिंता जाहिर की है। साथ ही सरकार से अपील की विवाह रोकने के लिए कानून का सख्ती से पालन करवाया जाए। ताकि अपराधियों के मन में खौफ पैदा हो |
जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, बाल विवाह के मामले में देशभर में झारखंड का 11वां स्थान है। यह आंकड़ा राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है, सर्वेक्षण के अनुसार देश में 20 से 24 साल की उम्र की 23.3 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिनका बाल विवाह हुआ है। वहीं राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। एनसीआरबी के अनुसार प्रदेश में साल 2019 में तीन, साल 2020 में तीन और साल 2021 में चार मामले ही बाल विवाह के दर्ज किए गए। इससे स्पष्ट है कि बाल विवाह के मामलों की पुलिस में शिकायत ही नहीं की जा रही है। लोग इस सामाजिक बुराई के प्रति आंखें मूंदकर बैठे हैं।

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