
लोगों को करना होगा अपना मल डोनेट, है डोनर की तलाश
चौंकाने वाली बात यह भी है कि इंसान का मल भी कई तरह का होता है, जैसे अच्छी और बुरा क्वालिटी वाला| मरीजों के इलाज के लिए अच्छी क्वालिटी वाले मल की जरूरत होती है |
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कौन करा रहा है मलदान, इससे कैसे होगा फायदा ?
ऑस्ट्रेलिया की बायोम बैंक फर्म को ऐसे स्वस्थ लोगों की तलाश है जिनसे उच्च गुणवत्ता वाला मल प्राप्त किया जा सके| इस तरह का मल दान करने वाले लोग आसानी से नहीं मिल रहे हैं | इसलिए ऐसे यूनिक डोनर को यूनिकॉर्न्स भी कहा जा रहा है| ये लोग बड़ी मुश्मकिल से मिलते हैं | आपको बता दूं कि मल का दान करने के लिए बायोम बैंक ने एक खास तरह का टॉयलेट भी तैयार किया है | इस टॉयलेट में मल का दान करने पर यह सीधेतौर पर एक मशीन में चला जाता है|
मशीन में डोनर का मल पहुंचने के बाद उसकी जांच की जाती है | हर मल में बैक्टीरिया होते हैं | मल क्वालिटी अच्छी होने पर उसमें से अच्छे बैक्टीरिया को अलग किया जाता है| इन बैक्टीरिया को थैरेपी की मदद से बायोम बैंक और बेहतर बनाता है|
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कैसे होता है मरीज का ट्रीटमेंट ?
जब अच्छी क्वालिटी के बैक्टीरिया मिल जाते हैं तो उन बैक्टीरिया को लैब में कई तरह के रसायनों के जरिए ताकतवर बनाया जाता है, ऐसा कंपनी ने बताया | फिर उन बैक्टीरिया की मदद से ममरीजों का इलाज किया जाता है| ये बैक्टीरिया मरीज के आंतों में पहुंचकर बीमारी के असर को कम करते हैं और इसे धीरे-धीरे स्वस्थ बनाने का काम करते हैं| बैक्टीरिया को ताकतवर बनाने के बाद इन्हें एक सुरक्षित जगह पर रख दिया जाता है| और जरूरत पड़ने पर इसे मरीज की आंत में डाला जाता है ताकि उसके स्वास्थ में सुधार हो |
अब समझिये कि बैक्टीरिया कैसे काम करती है?
हम सब जानते हैं कि प्राकृतिक तौर पर इंसान की आंतों में कई ऐसे बैक्टीरिया पाए जाते हैं जो खाने को पचाने में अहम भूमिका निभाते हैं |अगर ये बैक्टीरिया इंसान के शरीर में न हो तो हम भोजन नहीं पचा पाएंगे | इसके अलावा ये रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में भी मदद करते हैं| बदलते समय के साथ लोगों के खान पान में काफी बदलाव आया है |अब पैकेज्ड फ़ूड, जंक फ़ूड, स्ट्रीट फ़ूड, फ़ास्ट फ़ूड समेत ऐसी कई चीजें शामिल हो गयी है जिसका असर सीधे इन बैक्टीरिया पर पड़ रहा है| नतीजा, इन अच्छे बैक्टीरिया की संख्या घटती जा रही है और पेट से जुड़ी कई तरह की बीमारियां बढ़ने लगी हैं| यही कारण है कि मल से बैक्टीरिया को निकालकर ऐसे मरीजों के शरीर में डालने की तैयारी जारी है जिन्हें आँतों की समस्या है या अन्य पेट से जुड़ी बीमारियाँ है |
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मल अच्छा है या बुरा, कैसे होगी इसकी जांच ?
मल लेनें से पहले देखा जायेगा कि वो स्खावास्सथ है या नही | मतलब कि उसी इंसान का मल लिया जाएगा जो पूरी तरह से स्वस्थ है | बायोम बैंक की एक्सपर्ट डॉ. एमिली टकर कहती हैं, ‘मल मिलने के बाद हम उसकी जांच करते हैं| जांच में यह देखा जाता है कि उस इंसान को कोई संक्रमण या बीमारी तो नहीं है| इसके अलावा इंसान की मेडिकल और एंटीबायोटिक हिस्ट्री को भी देखा जाता है| ऐसा इसलिए भी है क्योंकि जो लोग एंटीबायोटिक्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं उसका असर उनके शरीर में मौजूद बैक्टीरिया पर भी पड़ता है|’
‘दूसरे के मल से इलाज बुरी बात नहीं’
बायोम बैंक के चीफ मेडिकल ऑफिसर सैम कोस्टेलोसैम कोस्टेलो का कहना है कि पृथ्धवी पे इंसान ही एकमात्र ऐसा जीव है जिसके शरीर में सबसे ज़्यादा बैक्टीरिया पाए जाते हैं | लेकिन बदलते दौर के साथ खान पान में बदलाव सेहत पे काफी असर करता है | अनहेल्दी खाना खाने से शरीर को फायदा पहुंचाने वाले बैक्टीरिया (माइक्रोब्स) की संख्या में कमी आ रही है| इंसान को इस बात का ख़ास ध्यान रखना है कि उनके खाने के चयन से ही उनके शरीर के बैक्टीरिया की क्वालिटी निर्भर करती है | अगर अच्छी क्वालिटी की बैक्टीरिया तेजी से खत्म होने लगीं तो बीमारियां बढ़ती जाएंंगी| इसलिए मल से उन बैक्टीरिया को निकालकर इलाज किया जा सकेगा | ऐसे में दूसरे के मल से किसी इंसान की बीमारी को ठीक करने में कोई दिक्कत नहीं है|

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