
बच्चे भी बचपन से स्वयं को तन मन से चुस्त-दुरूस्त रख सकते हैं
विश्व ध्यान दिवस के दिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सरायकेला के योग प्रशिक्षक आनंद महतो ने बताया कि अभी तक मेडिटेशन बड़ों के लिए काम की चीज मानी जाती थी, पर आधुनिक समय में बचपन से ही बच्चों पर इतना स्ट्रेस रहता है कि अब उनके लिए भी मेडिटेशन एक लाभप्रद जरिया बन सकता है। बच्चे भी बचपन से स्वयं को तन मन से चुस्त-दुरूस्त रख सकते हैं। अगर उन्हें बचपन से मेडिटेशन के लिए 5 से 10 मिनट नियमित बैठाया जाए। उनका दिमाग शांत रहेगा और ध्यान केंद्रित रहेगा, तभी पढ़ाई भी पूरे मन से कर पायें बच्चों को मेडिटेशन कराने के टिप्स मेडिटेशन के दौरान रिलैक्स करने वाला म्यूजिक लगा सकते हैं ताकि मन एकाग्र रहे।
बच्चों को बताएं कि आंखें बंद कर, ज्ञान मुद्रा में बैठें। जो विचार आ रहे हैं, उन्हें आने दें ताकि अंदर से खाली हो सकें। कुछ दिन तक यही प्रयास करवाएं।
जब मन स्थिर होना प्रारंभ हो तो उन्हें एक स्थान पर फोकस करना सिखाएं जैसे भौंहों के मध्य में, बादलों की दुनियां में, पहाड़ों पर आदि। इससे मन एक स्थान पर स्थिर होना शुरू कर देगा। बच्चों को ओम ध्वनि बोलना सिखाएं। लंबे गहरे श्वास लेते हुए श्वासों पर ध्यान करें। ओम का लंबा उच्चारण करवाएं 5 से 11 बार। इससे भी मन शांत रहेगा। इन सबका अभ्यास नियमित करवाएं। तभी लाभ मिलेगा।
मेडिटेशन से एकाग्रता बढ़ती है। दिमाग तेज और सक्रिय रहता है।
नियमित अभ्यास से याददाश्त बढ़ती है। गुस्से पर काबू पाया जा सकता है। अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल पा सकते हैं और जल्दी रिएक्ट न करना सीख जाते हैं। मन को काबू में रखना सिखाता है।

नुनु राम महतो विगत 20 वर्षों से गोप बन्धु उच्च विद्यालय हामन्दा शिक्षक, प्रधानध्यापक एवं समाजसेवी के रूप में कार्य कर चुके हैं। 3 वर्षों से प्रेस रिपोर्टर के रूप में भी कार्यरत हैं और उसके साथ ही एक साल से मशाल न्यूज के लिए काम कर रहे हैं।
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