
जंगल से ही आदिवासियों की पहचान है
बालिगुमा के खीकड़ीघुटु में 17 मार्च को संथाल समाज के परंपरा के अनुसार बाहा सेंदरा का आयोजन किया गया. बाहा सेंदरा यानि बाहा पर्व के अवसर पर संथाल समुदाय में दूसरे दिन शिकार करने के लिए जाने का परंपरा है. संथाल समुदाय ने इसे आज भी जारी रखा है. हालांकि जंगलों के घटने के कारण जंगली जानवर भी कम हो गए हैं. इसलिए अभी सिर्फ शिकार सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से ही मनाया जाता हैं. लेकिन नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि यह जंगल आदिवासियों के हैं और जंगल से ही आदिवासियों की पहचान है. इसके लिए बाहा सेंदरा का आयोजन हर वर्ष किया जाता है.

शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
Join Mashal News – JSR WhatsApp
Group.
Join Mashal News – SRK WhatsApp
Group.
सच्चाई और जवाबदेही की लड़ाई में हमारा साथ दें। आज ही स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें! PhonePe नंबर: 8969671997 या आप हमारे A/C No. : 201011457454, IFSC: INDB0001424 और बैंक का नाम Indusind Bank को डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर कर सकते हैं।
धन्यवाद!