
एक प्राइवेट जॉब एम्प्लोयी की कमाई इतनी कि खा-पीकर महीने के 30-40 हजार बच जाएं l लेकिन हाल तक इस बचत का ज्यादातर हिस्सा भी नई जरूरतों और शौक पर खर्च हो जाया करते है l इसके बाद जो कुछ बचता उसमें से कुछ फिक्स्ड डिपॉजिट करते या कंपनी में ही वॉलिंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) में कटवा देते l
पर पिछले कुछ साल से लोगों की ये सेविंग हैबिट दुसरे रंग में तब्दील हो चुकी है l लेकिन अब लोग डिमैट अकाउंट खुलवा रहे हैं और दोस्तों से निवेश पोर्टफोलियो शेयर करते फिरते हैं l
शेयरों की तेजी पर फिदा लोग
अप्रैल से अक्टूबर 2021 के बीच 1.9 करोड़ खाते खुले हैं l यानी हर महीने 26.7 लाख नए अकाउंट l यही वो दौर है, जब सेंसेक्स ने 48 हज़ार से 62 हज़ार तक की बुलंदी छुई थी l थोड़ा पीछे जाएं तो कोविड की पहली लहर के दौरान निचले स्तरों से तो यह रिकवरी 150 फीसदी से भी ज्यादा रही l जानकारों का कहना है कि जितने भी नए डिमैट अकाउंट खुले हैं, उनमें तीन चौथाई लोग 30 साल से कम उम्र के हैं l यानी युवा वर्ग को मार्केट की तेजी ने खासा आकर्षित किया है l जानकारों का यह भी कहना है कि इस दौरान ज्यादातर शहरों में वर्क फ्रॉम होम के चलते नौकरीपेशा लोग घर-परिवार, टीवी, सोशल मीडिया और करीबियों के संपर्क में ज्यादा रहे l इससे भी उनकी मार्केट को लेकर जागरूकता बढ़ी और वो भी इस तेजी से जुड़ाव रखने को आतुर हुए l
दूसरा वह वर्ग था, जिसे नौकरियां गंवानी पड़ी l वह या तो अब भी बेरोजगार है या कोई छोटा-मोटा काम करने को मजबूर है l ऐसे लोगों में जल्द से जल्द उस आर्थिक घाटे की भरपाई करने की इच्छा प्रबल रही है l कुछ सर्वे में यह भी सामने आया था कि नौकरी खो चुके लोग बचत की रकम को ज्यादा से ज्यादा आक्रामक तरीके से निवेश करना चाहते हैं, ताकि जल्द से जल्द ज्यादा रिटर्न मिल सके l इस कारण उन्होंने सीधे शेयर मार्केट में उतरने का फैसला किया l
इसके अलावा हाल फिलहाल महंगाई दर भी एक बड़ी वजह है कि लोग फिक्स्ड इनकम स्रोतों से निराश हो रहे हैं और अपने बचत की रकम से कुछ ज्यादा रिटर्न कमाना चाहते हैं l
रिफॉर्म से जगा भरोसा
एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि 2014 के बाद से आर्थिक मोर्चे पर कई बड़े रिफॉर्म के चलते भी इकॉनमी और मार्केट में लोगों का भरोसा मजबूत हुआ हैl इससे वे मार्केट लिंक्ड इनवेस्टमेंट जरियों में पैसा लगाने का हौसला दिखा पा रहे हैंl
विशेषज्ञ दो क़िस्म की बातें कहते हैं l एक तो देश में आर्थिक अस्थिरता के लिए नोटबंदी और GST को दोषी ठहराया जाता है, वहीं एक तबका ये भी कहता है कि तमाम समस्याओं के बावजूद नोटबंदी ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया. साथ ही GST आने से टैक्स को लेकर हुए अनुपालन में बढ़ोतरी देखी गई l इसके अलावा जनधन योजना का भी ज़िक्र आता है l जिसके तहत करीब 35 करोड़ आबादी बैंकों से जुड़ीl इसके अलावा कई क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), बीमार और घाटे वाली कंपनियों के निजीकरण और लेबर रिफॉर्म के चलते भारत में निवेश का माहौल बना है l इन फ़ैक्टर से बाजारों को बल मिला है l
KYC पेमेंट
अब इस पूरे मामले में हमने ये भी पाया कि जिस तरह से डिजिटल पेमेंट और KYC के बीच के संबंध थोड़ा और प्रगाढ़ हुए, लोगों को शेयर मार्केट और इससे जुड़े निवेश जरियों की ओर थोड़ा और बढ़ावा मिला l ब्रोकरेज फर्म CLSA के मुताबिक भारत में डिजिटल पेमेंट की वैल्यू 300 बिलियन डॉलर सालाना पहुंच चुकी है l इसमें यूपीआई की हिस्सेदारी 60 फीसदी तक है l साल 2026 तक भारत में डिजिटल पेमेंट की वैल्यू 1 ट्रिलियन डॉलर को पार कर जाएगी l सीधे सरल शब्दों में कहें तो मोबाइल से मामला थोड़ा आसान हो गया l इंटरनेट और थोड़ी-सी पूंजी, एक खाता और एकाध ऐप – इतने से गाड़ी चल निकली l
डिजिटल पेमेंट की आदत लोगों में डिमैट एसेट के प्रति भरोसा जगा रही है l लोग मोबाइल में पैसा रखते और देते हुए समझने लगे हैं कि इसी तरह शेयर, म्यूचुअल फंड, गोल्ड ईटीएफ भी रखा और बेचा जा सकता है l इससे उनमें निवेश आदतें बदलने और प्रयोग करने का हौसला आ रहा है l यही वजह है कि डिमैट खातों की संख्या भी डिजिटल पेमेंट के ही समानांतर बढ़ रही है l
अंतिम बात
निवेश एक बहुत क़यासों पर चलने वाली शै है.. तमाम उलटबांसियां भी हैं l फ़ायदे की बात होती है तो ख़तरे भी होते ही हैं l पैसा आपका है तो विवेक भी आपका ही होना चाहिए l अपने विवेक और तमाम ख़तरों को ध्यान में रखते हुए निवेश का फ़ैसला लें l
Also Read :बिहार: नहीं थम रहा शराब का कारोबार, माफिआ हैरान… पुलिस परेशान !

Join Mashal News – JSR WhatsApp
Group.
Join Mashal News – SRK WhatsApp
Group.
सच्चाई और जवाबदेही की लड़ाई में हमारा साथ दें। आज ही स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें! PhonePe नंबर: 8969671997 या आप हमारे A/C No. : 201011457454, IFSC: INDB0001424 और बैंक का नाम Indusind Bank को डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर कर सकते हैं।
धन्यवाद!