
बिहार के मुजफ्फरपुर में ताजा हुए एंकाउंटर से कई तरह के सवाल उठे हैं। एक तरफ करीब 20 मिनट तक अपराधियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई। चार अपराधियों को गोली लगी और आठ हथियार बंद लुटेरे गिरफ्तार हुए। वहीं कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। जानकारी के अनुसार करीब 8 पुलिसकर्मियों का इलाज चल रहा। इन्हें भागने और ऑपरेशन के दौरान हल्की चोटें आईं हैं लेकिन एसएसपी एक पुलिसकर्मी के घायल होने की बात स्वीकार रहे हैं।मुजफ्फरपुर में एंकाउटर चार में से तीन घटना पश्चिमी इलाके में ही और चार में तीन वाहन एजंसी के सामने ही
ढ़ाई साल के कार्यकाल चार एंकाउंटर…महज संयोग या कुछ और !
एसएसपी जयंतकांत के कार्यकाल के करीब ढ़ाई साल के दौरान करीब चार एंकाउंटर हुए जिनमें से ज्यादतर एक ही स्क्रिप्ट पर लिखी नजर आती है। पहला मामला 7 दिसंबर 2021 का है। जहां कटरा के जजुआर में कुख्यात शराब माफिया सावन ठाकुर के एंकाउंटर का था।
दूसरा मामला मुजफ्फरपुर के पंचमुखी चौक के पास है। जहां बाइक एजंसी के पास 13 सितंबर 2021 को एंकाउंटर हुआ था। अपराधी बैंक लूटने आए थे। तीसरा मामला मोतीपुर बाइक एजेंसी के पास ही एक एंकाउंटर हुआ। घटना में एक अपराधी ढेर हुआ था। तीन अन्य घायल हुए थे।
चौथा मामला भी पश्चिमी मुजफ्फरपुर है। जहां अपराधी मोतीपुर प्रखंड में मौजूद एक बाइक एजेंसी पेट्रोल पंप लूटने आए थे। चार में तीन धटना पश्चिमी इलाके की है। चार में से तीन वाहन एजेंसी के सामने के पास की है। ये घटनाएं महज संयोग या कुछ और।
जयंतकांत तेज तर्रार अधिकारियों में गिने जाते
करीब ढ़ाई साल के कार्यकाल में चार इंकाउंटर और ऐसे अपराधियों को गिरफतार करने का सेहरा एसएसपी जयंतकात के सिर बंधता है। कभी मुजफ्फरपुर अपराध का बड़ा हब माना जाता था। अपराधी मुजफ्फरपुर पुलिस के लिए सर का दर्ज बने हुए थे।
जयंतकांत तेज तर्रार अधिकारियों में गिने जाते हैं। कांटी थाना क्षेत्र का एक अपराधी मोबाइल ही प्रयोग नहीं करता था। वो अपने साथियों बातचीत के लिए इंटर नेट कॉलिंग का प्रयोग करता था। बताते चलें कि जयंत कांत आईटी के अच्छे जानकार हैं और इंटरनेट के तमाम उलझनों को सुलझाते हुए उन्होंने आइपी एड्रेस ट्रेसकर अपराधी को कोलकाता से गिरफतार किया था।
2021 में प्लांड मर्डर की साजिश को नाकाम किया…नकली नोटों का खेप पकड़ा
पिछले साल 2021 में भी इन्होंने मोबाइल सर्विलांस के आधार पर हत्या से पूर्व प्लांड मर्डर की साजिश को नाकाम किया था। मामला शराब माफिआयों के सिंडीकेट से जुड़ा था। ये शराब माफियाओं का विरोध करने वाले व्यक्ति की साजिश रची जा रही थी। इसमें भी सर्विलांस के आधार पर साजिश ना काम की थी।
अभी गत सप्ताह की ही बात की जाए तो नकली नोटों की बड़ी खेप पकड़ने का क्रेडिट एसएसपी जयंत कांत को ही जाता है। जयंतकात ने बताया किे वो एक साल से इस सिंडीकेट को धव्स्त करने की कोशिश में जुटे थे। नकली नोट बनाने वाला गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहा था। जिसे पकड़ने में उन्हे खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इसके तार नेपाल और बिहार के कई जिलों से जुड़ रहे थे। गिरोह अंतरराष्टीय स्तर पर नकली नोटों के कारोबार से जुड़ा हुआ था। इनके पास के 11.55 लाख बरामद हुए थे।
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