
झारखंडी भाषा संघर्ष समिति राज्य में मैथिली, भोजपुरी, मगही और अंगिका को क्षेत्रीय भाषा में शामिल करने का विरोध रही है. इन क्षेत्रीय भाषाओं का विरोध देख उर्दू प्रेमियों की चिंता बढ़ गई है.
उन्हें आशंका है कि बाहरी भाषा बताकर उर्दू को भी हटाने की मांग जोर पकड़ सकती है.
गुरुवार को उर्दू पढ़ाओ तहरीक झारखंड ने जामतारा पंचायत सचिवालय सभागार में उर्दू भाषा की उन्नति के लिए चितन शिविर लगाया। शिविर में डुमरी और बगोदर प्रखंड के विभिन्न गांवों के लोग उपस्थित हुए। इसमें उर्दू भाषा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार से मांग की गई.
प्लस टू स्कूलों में उर्दू शिक्षक पद सृजित करने को हाईकोर्ट के निर्देश का अनुपालन करने, स्कूलों में खाली पड़े कुल 4401 में से 3712 स्नातक टेट पास शिक्षकों की भर्ती करने, उर्दू शिक्षक के आरक्षित बचे पदों को पिछड़ा व सामान्य वर्ग से भरने, उर्दू प्रारंभिक विद्यालयों में उर्दू लिपि की किताबें व पढ़ाई सुनिश्चित करने, आठवीं कक्षा में उर्दू को वैकल्पिक विषय से हटाकर मुख्य विषय में शामिल करने, उर्दू एकेडमी और मदरसा बोर्ड का गठन अविलंब करने, द्वितीय राज्य भाषा उर्दू के लिए 2007 में जारी संकल्प लागू करने, मदरसा के आलिम और फाजिल की परीक्षा विवि से कराने की मांग शामिल हैं.
युवा प्रदेश महासचिव मंसूर आलम ने झारखंडी भाषा संघर्ष समिति के सदस्यों के हवाले से बताया कि हमलोग उर्दू के खिलाफ नहीं हैं तथा उर्दू भाषा को हटाने की मांग नहीं कर रहे हैं.
मौके पर रहनुमा फाउंडेशन रे प्रेसिडेंट मौलाना पीरबक्स, रुस्तम अंसारी, अमन फाउंडेशन झारखंड के मौलाना मुख्तार अहमद, अख्तर अंसारी, मौलाना मुनाजिर हसन, सुलेमान अंसारी, नईम अंसारी, कुतुबुद्दीन अंसारी, मकसूद आलम, सलामत अंसारी, मुश्ताक हाफिज, फारूक, बशीरुद्दीन अंसारी आदि उपस्थित थे.

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