
शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के समक्ष जीविकोपार्जन की समस्या उत्पन्न हो गई है
झारखंड राज्य महाविद्यालय इंटरमीडिएट अनुबंध शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर मोर्च का एक प्रतिनिधिमंडल आज शनिवार को राज्य के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन से उनके आवास पर मिला और अपनी मांगें रखीं. उनको सौंपे मांग-पत्र में मोर्चा ने कहा है कि झारखंड राज्य के 65 अंगीभूत डिग्री महाविद्यालयों के इंटरमीडिएट प्रभाग के 5000 शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी-गण है। नई शिक्षा नीति 2020 के लागू हो जाने के कारण सभी शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के समक्ष जीविकोपार्जन की समस्या उत्पन्न हो गई है।
नई शिक्षा नीति के तहत इंटरमीडिएट के पाठ्यक्रम को महाविद्यालयों से अलग करते हुए स्कूली शिक्षा में शामिल किया जा रहा है। लिहाजा इंटरमीडिएट शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों के समक्ष रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है, क्योंकि महाविद्यलयों में इंटर को अलग किया जा रहा है परंतु हमारा समायोजन प्लस 2 स्कूलों में नही किया जा रहा है। महोदय से कहना चाहते हैं कि प्लस टू स्कूलों में हमारा समायोजन किया जाए।। वर्ष 2008 से हम अपनी सेवा आज की तिथि तक देते आ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर पिछले वर्ष नामांकन हुआ था और उन्होंने कहा था कि वे समायोजन की दिशा में काम करेंगे।
यदि प्लस टू स्कूलों में समायोजन की दिशा में सरकार कदम उठाती है तो सभी शिक्षकों का भला हो जाएगा और अपने घर परिवार को भी अच्छे तरीके से चला पाएंगे, भरण पोषण कर पाएंगे। सभी शिक्षक अनुभवी हैं और अपने कार्यों में दक्ष हैं। समायोजन की आशा के साथ सरकार पर आस लगाए हुए हैं। मोर्चा ने समायोजन जल्द से जल्द करने की दिशा में पहल प्रारंभ करने की का मुख्यमंत्री से अनुरोध किया।

शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
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