
निजी स्कूलों को मान्यता लेने के लिए नियमावली में तय भूमि की शर्त में बदलाव हो सकता है
शिक्षा विभाग ने इसके लिए दूसरे राज्यों की नियमावली का भी अध्ययन किया है. अधिकतर राज्यों में स्कूलों की मान्यता के लिए जमीन की शर्त नहीं है |
स्कूलों को मान्यता लेने में सुविधा होगी, शिक्षा विभाग ने संशोधन को लेकर प्रस्ताव तैयार कर लिया है. राज्य में वर्ष 2011 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ था. फिर वर्ष 2019 में नियमावली में पहला संशोधन हुआ और अब दूसरा संशोधन होगा. इससे निजी स्कूल के संचालकों को राहत मिलेगी |
विभाग आरटीइ नियमावली में कर रहा संशोधन
2019 के बाद अब नियमावली में दूसरा संशोधन किया जायेगा
2009 से पूर्व के स्कूलों पर भी प्रभावी होगा
अधिनियम के तहत सीबीएसइ व जैक बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों को भी कक्षा एक से आठ तक के लिए मान्यता लेने का प्रावधान है. ऐसे में वैसे विद्यालय जिन्हें वर्ष 2009 से पूर्व से मान्यता मिली है, उनके लिए भी भूमि की शर्त अनिवार्य है. ऐसे विद्यालयों के लिए मान्यता लेना संभव नहीं हो पा रहा है |
अन्य राज्यों की नियमावली का भी किया गया है अध्ययन
अधिकतर राज्यों में स्कूलों की मान्यता के लिए जमीन की शर्त नही है ,
बदलाव के बाद क्या हो सकता प्रावधान
स्कूलों को मान्यता के लिए भूमि की शर्त से छूट दी जा सकती है. कक्षा एक से पांच व छह से आठ तक के लिए स्कूल के पास क्या-क्या संसाधन होना चाहिए, इसे अनिवार्य किया जा सकता है. स्कूल में कक्षा के अनुरूप कमरा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल का मैदान समेत अन्य संसाधन की आवश्यकता को तय किया जा सकता है |
7000 से अधिक स्कूल राज्य में
राज्य में सात हजार से अधिक विद्यालय हैं, जिन्हें शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता लेनी है. ज्ञात हो कि मान्यता नहीं लेनेवाले स्कूलों पर कार्रवाई का भी प्रावधान है |

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