
मिलावटी दूध, आटा बेचकर बेकसूर इंसानों की जान के लाले डाल देने वालों की अब खैर नहीं है. रातों-रात खुद को धन्नासेठ बनाने के ख्वाब पालने वाले ऐसे खतरनाक मिलावटखोर व्यापारियों के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज होगा ही.
कोर्ट में अगर संदिग्ध को मुजरिम करार दिलवा दिया गया, तो उसकी गिरफ्तारी और जेल तय है. इसके दो ताजा तरीन नमूने हाल ही में देखने को मिले हैं. जिनमें ऐसे मिलावटखोरों को अलग अलग मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. एक मामले का फैसला 23 साल बाद जबकि दूसरे मामले में 25 साल बाद मुजरिमों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा सकी है. साथ ही अर्थदण्ड भी डाला है.
मिलावटखोरों को सबक देने वाला पहला फैसला उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले की एक कोर्ट ने सुनाया है. मामला सन् 1999 का है. इस सिलसिले में 17 मई 1999 को चौक थाना क्षेत्र के खजुरिया निवासी रामसजन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था. रामसजन पर आरोप था कि वह दूध में मिलावट करके बेचता रंगे हाथ पकड़ा गया था. हालांकि आरोपी कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने तक खुद को पाक-दामन की बताता रहा था. मगर जांच एजेंसी द्वारा कोर्ट में दाखिल सबूत आरोपी के इस कदर खिलाफ गए कि, कोर्ट ने 23 साल बाद अब अंतत: मुजरिम को उम्रकैद की सजा और 20 हजार रुपए अर्थदण्ड सुनाया है.
23 साल पहले ऐसे पकड़ा गया था दूध मिलावटखोर
सहायक शासकीय अधिवक्ता सर्वेश्वर मणि त्रिपाठी ने मीडिया को बताया कि, घटनाक्रम के मुताबिक 17 मई 1999 को स्थानीय ऑफिसर गेट कालोनी के पास से आरोपी को पकड़ा गया था. तत्कालीन जिला खाद्य निरीक्षक एम एल गुप्ता ने तब तीन दूध विक्रेताओं के कब्जे से दूध में मिलावट करने के संदेह में नमूने सील किए थे.
बाद में प्रयोगशाला से हासिल रिपोर्ट में यह बात साबित हो गई कि, दूध में मिलावट थी. लिहाजा चौक थाना क्षेत्र के खजुरिया निवासी रामसजन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया गया. यह वही रामसजन है जिसे अब 23 साल बाद कोर्ट ने उम्रकैद और 20 हजार अर्थदण्ड की सजा सुनाई है. शुक्रवार को कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील द्वारा सबूतों के साथ.
25 साल पुराने मामले में कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद
मामले में 4 गवाहों की गवाही भी कराई गई. मिलावटखोरों के खिलाफ की गई कानूनी कार्यवाही के तहत उम्रकैद की सजा सुनाए जाने का दूसरा मामला भी उत्तर प्रदेश का ही है. इस मामले में शाहजहांपुर की एक अदालत ने 25 साल पुराने मामले में आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही मुजरिमों पर अर्थदण्ड भी डाला है.
यह मुकदमा सन् 1997 का है. इस मुकदमे की फाइलें पलटने पर पता चलता है कि, एक ईंट-भट्टे पर मजदूरी करने वाले लोगों ने दो दुकानों से आटा खरीदा था. उस आटे से बनी रोटियां खाते ही कई लोग एक साथ बीमार हो गए. बाद में एक एक करके उन बीमारों में से 14 की मौत हो गई. जिला अपर सत्र न्यायालय-द्वितीय द्वारा 25 साल बाद दिए गए फैसले में, अब 2 मुजरिमों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

Join Mashal News – JSR WhatsApp
Group.
Join Mashal News – SRK WhatsApp
Group.
सच्चाई और जवाबदेही की लड़ाई में हमारा साथ दें। आज ही स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें! PhonePe नंबर: 8969671997 या आप हमारे A/C No. : 201011457454, IFSC: INDB0001424 और बैंक का नाम Indusind Bank को डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर कर सकते हैं।
धन्यवाद!