
दुमका में एक महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने को लेकर कोर्ट ने फैसला सुनाया है|
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार मिश्रा ने सोमवार को महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति बसंत कुमार साह को 10 साल की सजा और पचास हजार रुपया जुर्माना लगाया है. वहीं जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर छह महीने का अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है. जबकि जेठानी किया देवी और भांजी नेहा को तीन तीन साल की सजा और पंद्रह हजार रुपया जुर्माना लगाया है|
ससुराल पर दहेज की मांग का आरोप
दरअसल वन विभाग में कार्यरत ज्योति गुप्ता की शादी दो दिसंबर 2016 को दुमका के बसंत कुमार साह के साथ हुई थी. बसंत बैंक में मैनेजर था. ज्योति के पिता ने उनकी शादी बड़ी धूमधाम से की थी, लेकिन शादी के कुछ ही महीने बाद पति-पत्नी के रिश्ते में खटास आ गई. आरोप है कि ससुरालवालों ने शादी के एक महीने बाद से ही उसपर दहेज में कार और घर बनाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया था|
तंग आकर की आत्महत्या
आरोप ये भी है कि मांग पूरी नहीं हो पाने के कारण सभी ज्योति के साथ मारपीट करते थे. इस बीच लड़की अपने मायके आ गई और ससुराल के प्रताड़ना पर काफी दुखी थी. वहीं 22 अप्रैल 2017 को ज्योति कुमारी गुप्ता ने अपने ही मायके में फांसी लगाकर जान दे दी. मरने से पहले उसने जो सुसाइड नोट छोड़ा था, उसमें पति के अलावा जेठानी किया देवी और भांजी नेहा को जिम्मेदार ठहराया था|
तीन लोग दोषी करार
पुलिस ने मौके पर मिले सुसाइड नोट और पिता के बयान पर परिवार के सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. अभियोजन पक्ष ने इस केस में 17 गवाहों जबकि बचाव पक्ष ने अपनी ओर से तीन गवाह को कोर्ट में पेश किया और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने तीनों को दोषी ठहराया. अभियोजन पक्ष की ओर से चम्पा कुमारी और बचाव पक्ष से सोमा गुप्ता थी|

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