
लोकतंत्र को बचाने के लिए शांति मार्च
इंस्टीट्यूट फॉर सोशल डेमोक्रेसी के माध्यम से विगत गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में शांति मार्च का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ० सुखचंद झा उपस्थित रहे. साथ ही विभिन्न जगहों से 60 से ज्यादा युवाओं ने इस कार्यक्रम में भागीदारी निभाई. शांति मार्च अंबेडकर चौक, साकची से होते हुए बिरसा चौक में समाप्त हुआ. इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य युवाओं तथा देश के लोगों में लोकतंत्र के मायने बतलाना था, आज जिस तरीके से देश में जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद जैसे तमाम विषयों पर आपस में लोग लड़ रहे हैं तथा एक संप्रदाय दूसरे संप्रदाय के प्रति हिंसक प्रवृत्ति अपना रहा है. तब ऐसे समय में लोकतंत्र को मजबूत बनाने तथा संविधान के बताए हुए मूल्य पर चलने की जरूरत है।
देश में विगत कुछ वर्षों में सामाजिक व राजनीतिक पटल पर जो नकारात्मक बदलाव आए हैं, उसे देखते हुए इस तरह के अभियान की महती आवश्यकता है.
इस अवसर पर डॉ० झा ने सभी युवाओं को संबोधित किया और लोकतंत्र के महत्व को को बरक़रार रखने के संदर्भ में जानकारी दी तथा रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया. रैली में सभी युवाओं ने ‘संविधान को बचाना है’, ‘लोकतंत्र को बचाना है’ के नारों से पूरा साकची क्षेत्र गूंज उठा, कार्यक्रम में आईएसडी से समन्वयक गौतम गोप शांति मार्च में ऊर्जा भरने का काम किया. कार्यक्रम के सफल आयोजन में अनीता महतो, अभिमन्यु पातर, खुशबू कुमारी, मौसरी हंसदा, लक्ष्मी सामद, भारती कुमारी और युवा साथी अंकुर शाश्वत की महत्वपूर्ण योगदान रहा.
शांति सद्भाव और लोकतंत्र के बारे में परिचर्चा
दूसरे चरण में सोनारी स्थित जगन्नाथ सभागार में कार्यशाला आयोजित किया गया, जिसमें शांति सद्भाव और लोकतंत्र के बारे में परिचर्चा की हुई. चर्चा में गौतम ने सब सबको युवाओं का आह्वान किया, कि सभी को किस तरीके से संविधान को बचाने के लिए और लोकतंत्र को बचाने के लिए आगे आकर के काम करने की आवश्यकता है. आज संविधान ही वह अधिकार दिया है, जिससे देश के नागरिक अपने आप को बराबरी के दर्जा में रख पाते हैं. अंतिम कार्यक्रम के रूप में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें विभिन्न गांव एवं बस्ती के युवा दल ने लोक नृत्य और नाटक का मंचन किया.
हर दिन संविधान व लोकतंत्र बचाने की हो क़वायद
सिर्फ़ किसी दिन विशेष ही नहीं, वरन लगभग हर दिन समाज के सक्रिय लोगों को संविधान के बारे में समाज को बताने और लोकतंत्र की रक्षा हेतु प्रेरित करने का दायित्व लेना होगा. यह देश और समाज के हित के लिए और सबसे विशेष रूप से स्वयं के हित के लिए परम आवश्यक है.
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शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
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