
देश के आदिवासियों के मानव अधिकारों का हनन एक गंभीर मुद्दा है
साकची में सामाजिक राजनीति संगठनों से जुड़े लोगों ने संविधान दिवस मनाया। इस अवसर पर वक्ताओं ने संविधान सभा समिति में झारखंड के लोगों के योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि झारखण्ड से जयपाल सिंह मुंडा, कैलाश नाथ कुजूर जैसे महान नेताओं ने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वक्ताओं ने संविधान के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान हमारे जीवन में काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हमें हमारे अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में बताता है और हमें एक सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाज में रहने का अवसर प्रदान करता है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि संविधान में आदिवासियों के लिए वर्णित कई मुख्य काम आज तक नहीं हुआ है। उन्होंने झारखंड में पेसा कानून लागू नहीं होना भी उनमें से एक है। इसके अलावा देश के आदिवासियों के मानव अधिकारों का हनन हो रहा है, जो कि एक गंभीर मुद्दा है। यह सब भी बंद होना चाहिए।
वनअधिकार कानून में वनों पर निर्भर लोगों को वन पट्टा देना है, लेकिन आज भी इस कानून का सही पालन नहीं हो रहा है। वन संरक्षण नियम-2022 आदिवासियों और वनाधिकार कानून-2006 के लिए खतरा है.
मौके पर दीपक रंजीत, कृष्णा लोहार, सुबोध गौड़, विकास कुमार, अंकुर, सुनील हेम्ब्रम, सतेंद्र पाल सिंह, हेमंत गौड़, राइमूल बंडरा, बादल धोरा, आजाद महतो, मुकेश गौड़, मनिंदर सिंह आदि लोग उपस्थित थे.

शशांक शेखर विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता, आकाशवाणी व सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं साथ ही लघु/फीचर फिल्मों व वृत्त चित्रों के लिए कथा-लेखन का कार्य भी विगत डेढ़ दशकों से कर रहे हैं. मशाल न्यूज़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों से कार्यरत हैं.
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