
रांची में 10 जून को हुई हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले पोस्ट पर पुलिस की कड़ी निगाह है। ऐसे पोस्ट करने वालों पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कोतवाली थाने में साइबर डीएसपी यशोधरा के निर्देश पर फेसबुक व इंस्टाग्राम में भड़काऊ पोस्ट करने वाले छह यूजरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी यूजर राहुल कुमार गुप्ता, हमीद रजा, मेराज गुड्डू, मुकर्रम हयात, मो हकीम और आईटीजेड जैद 786 पर हुई है।
पुलिस के अनुसार, इन लोगों के नाम से फेसबुक व इंस्टाग्राम में धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले पोस्ट किया और उसे शेयर भी किया है। इसकी जानकारी मिलने पर साइबर सेल की टीम ने इसकी जांच की। जांच करने पर पुलिस को इन यूजरों के कई ऐसे पोस्ट मिले हैं, जिसमें दो समुदाय के बीच नफरत फैलाने वाला है। साइबर सेल की टीम ऐसे और भी यूजरों की जांच कर रही है।
गौरतलब हो कि दस जून को रांची के टैक्सी स्टैंड में नुपूर शर्मा की आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में एक विशेष समुदाय की ओर से प्रदर्शन किया गया था। भीड़ उग्र हो गयी और पुलिस पर पथराव करने लगी। जिसे देखते हुए पुलिस ने फायरिंग कर दी थी। इसके बाद से लगातार फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाने लगी।
आजीवन जाना पड़ सकता है जेल
देश में सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाह फैलाना, जिससे किसी भी धर्म या जाति की भावनाओं को ठेस पहुंचे या दंगा भड़के, साइबर अपराध माना जाता है। ऐसे में दोषी को आईटी एक्ट 2008 के तहत आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। कानून के जानकार ये भी बताते हैं कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ आईपीसी के तहत केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। अगर कोई शख्स दो समूह, धर्म, नस्ल, जन्म स्थान, रिहायश या भाषा के नाम पर नफरत फैलाता है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा-153ए के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। सजा के साथ जुर्माना भी लग सकता है।

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