
झारखंड पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को कांडों की जांच के लिए विशेषज्ञ की आवश्यकता है। वजह यह है कि एसीबी के पास मैनहर्ट, टॉफी-टी-शर्ट, छात्रवृत्ति, कंबल घोटाला सहित आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के कई मामले जांच के लिए हैं।
इन मामलों की वजह से एसीबी अनुसंधान के बोझ तले दबा हुआ है। वहीं बल की कमी भी झेल रहा है। इन सब कारणों को देखते हुए सरकार से पांच अनुसंधान परामर्शी व तीन विधिक परामर्शी की मांग की है, ताकि एसीबी में अनुसंधान तेज और गुणवत्ता पूर्ण हो। इसके लिए सरकार को पत्र लिखा है। एसीबी ने सरकार को जानकारी दी है कि भारतीय दंड विधि व भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की जांच के तरीके भी अलग हैं। इसलिए अनुसंधान पदाधिकारी के पास जानकारी भी उस अनुरूप होना आवश्यक है।
पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का आग्रह
मंत्रिमंडल सचिवालय व निगरानी विभाग से किए गए पत्राचार में एसीबी ने आग्रह किया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में सेवा दे चुके सेवानिवृत्त एसपी या डीएसपी स्तर के पदाधिकारियों को अनुसंधान परामर्शी व विधिक परामर्शी में प्रतिनियुक्त किया जाए। इससे अनुसंधान पदाधिकारियों के अनुसंधान की गुणवत्ता सुधरेगी और विधिक मामले भी शीघ्र निष्पादित होंगे। अनुसंधान परामर्शी अनुसंधान पदाधिकारियों को उनके अनुसंधान को निखारने में भूमिका निभाएंगे, वहीं कोर्ट संबंधित मामलों में विधिक परामर्शी सहयोग करेंगे।
एसपी के 4 पद सृजित, दो पर ही कार्यरत
एसीबी में एसपी के चार पद सृजित हैं। इनमें सिर्फ दो एसपी मनी लाल मंडल व संध्या रानी मेहता ही कार्यरत हैं। इसमें भी संध्या रानी मेहता एसीबी में अतिरिक्त प्रभार पर है। वरीय पदाधिकारियों में एसीबी के प्रमुख का पद डीजी रैंक के अधिकारी का है, लेकिन डीजी नहीं होने से आईजी पंकज कंबोज के कंधे पर पूरे राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम संबंधित जांच के मानीटरिंग व एसीबी मुख्यालय की जिम्मेदारी है। एसीबी में एक डीआईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा हैं।

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